कचरे पर सियासत, हंगामे में दब गई सफाई कर्मचारियों की मांग
- पूर्वी दिल्ली नगर निगम की बैठक में हंगामा
- हड़ताल पर सफाई कर्मचारियों को नहीं मिला ठोस समाधान
- चर्चा करने की बजाए एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एक ओर दिल्ली में बारिश के साथ गंदगी से डेंगू और मलेरिया का आतंक है। वहीं, कई दिनों से चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सड़कों पर कचरों का अंबार लग गया है। सबसे ज्यादा हालात पूर्वी दिल्ली में खराब है। बावजूद इसके पूर्वी नगर निगम की बैठक में कचरे पर नेता सियासत करने से नहीं चूक रहे हैैं। बुधवार को सदन में सफाई कर्मियों की समस्या पर चर्चा की बजाए पक्ष-विपक्ष हंगामा करने में व्यस्त रहा। हंगामे के बीच स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन सत्यपाल सिंह ने प्रस्ताव पढ़ना शुरू किया, जिसमें 31 मार्च 1998 के बाद से लगे सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का प्रस्ताव भी था। इसमें सभी को स्थायी करने और दिल्ली सरकार से फंड मिलने के तुरंत बाद इनका बकाया देने की बात कही गई। प्रस्तावों को पास होने पर सदन की बैठक स्थगित कर दी गई।
सभा खत्म होने के बाद जब कर्मचारियों के नेता संजय गहलोत और जयभगवान चरण आम आदमी पार्टी और भाजपा के नेताओं के पास पहुंचे। आप नेताओं ने उनसे कहा कि वे उनके पक्षधर हैं और एक लिखित पत्र थमा दिया। वहीं, भाजपा मेयर ने उन्हें सदन में पेश प्रस्ताव की कॉपी थमा दी। लेकिन समाधान फिर भी नहीं मिला। इस पर कर्मचारियों के नेताओं ने झल्लाकर कहा कि उन्हें तो नेताओं ने खेल बना दिया है। कोई कहता है दिल्ली सरकार बजट नहीं दे रही तो कोई कहता है सरकार बजट क्यों दे? इनसब के बीच उनकी मांगों पर विचार तक नहीं किया जा रहा। इसलिए अब कर्मचारी अपनी हड़ताल को स्थगित नहीं करेंगे।