बायो गैस प्लांट लगाकर कचरे को कहें बाय-बाय
या
बायो गैस प्लांट से दूर होगी कचरे की समस्या
- रिन्यूवल एनर्जी एक्सपो में बायो गैस एसोसिएशन के विशेषज्ञ ने दी जानकारी
नंबर गेम
150 किलो कचरे की क्षमता के प्लांट से रोजाना 15 किलो एलपीजी के बराबर बॉयोगैस का उत्पादन
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। बायो गैस प्लांट लगाकर न सिर्फ बढ़ते कचरे की समस्या का निस्तारण किया जा सकता है। बल्कि प्लांट से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल रसोई में या फिर जेनरेटर चलाने में किया जा सकता है। सेक्टरों और आवासीय सोसायटी में अलग-अलग क्षमता के प्लांट लगाए जा सकते हैं। बृहस्पतिवार को इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मॉर्ट में आयोजित रिन्यूवल एनर्जी एक्सपो-18 में यह जानकारी इंडियन बायो गैस एसोसिएशन के विशेषज्ञ श्रीनिवास कसूला ने दी।
उन्होंने बताया कि महज तीन वर्गमीटर क्षेत्र में 200 फ्लैटों की सोसायटी में 150 किलो कचरे की क्षमता का प्लांट लगाया जा सकता है। करीब 7 लाख की लागत में बनाए जाने वाले इस प्लांट से रोजाना करीब 30 क्यूबिक मीटर बायोे गैस निकलेगी जो लगभग 15 किलो एलपीजी के बराबर होती है। वहीं 150 किलो से लेकर 700 किलो तक की क्षमता वाले प्लांट के निर्माण में 7 से लेकर 14 लाख रुपये की लागत आती है। हर प्लांट करीब 15 साल साल से ज्यादा काम करते हैं।
श्रीनिवास ने बताया कि पहले लोग बायो गैस प्लांट की गंध से लोग परेशान होकर इसे नहीं लगाते थे लेकिन अब जर्मन तकनीक से इस तरह के प्लांट बन रहे हैं कि प्लांट यदि घर के बगल में हो तो इसका पता तक नहीं चलेगा। पिछले 18 वर्षों में बेहद धीमी गति से लोगों ने इसे अपनाया लेकिन पिछले एक वर्ष में बेहद तेजी से लोग प्लांट लगवा रहे हैं।
जेनरेटर के माध्यम से बन सकेगी बिजली
बायो गैस प्लांट में एक से तीन लाख रुपये में अलग से जेनरेटर लगाया जा सकता है। एक जनरेटर के माध्यम से इससे बनने वाली गैस को ऊर्जा में तब्दील कर उपयोग किया जा सकता है।
राष्ट्रपति भवन में लग रहा है दो टन वेस्ट का बायो गैस प्लांट
श्रीनिवास कसूला ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में 60 लाख रुपये कीमत से दो टन (दो हजार किलो) का बायो गैस प्लांट स्थापित किया जा रहा है। यहां तीन कैंटीन में प्रतिदिन करीब 100 किलो बायो गैस दी जानी है। यहां लोगों से उत्सर्जित कचरे और गाय-घोड़ों के मल का भी प्लांट में उपयोग किया जाना है।
प्लांट न लगाने के लिए धमकी भी मिली
विशेषज्ञ श्रीनिवासन कसूला ने बताया कि मुंबई में कुछ वर्ष पहले जगह-जगह बायो गैस प्लांट लगाए जाने थे। तब कूड़ा डंप करने वाले ट्रांसपोर्टर से जुड़े माफिया ने उन्हें प्लांट न लगाने की धमकी भी दी।
एक आदमी मतलब 200 से 200 ग्राम कचरा रोजाना
इंडियन बायो गैस एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव केडिया ने बताया कि औसतन प्रति व्यक्ति एक दिन में करीब सौ से दो सौ ग्राम कचरा (भोजन सामग्री, छिलके, मल आदि) निकलता है। उन्होंने बताया कि कचरे के निस्तारण के साथ-साथ उसको डंप करने में ही हर शहर के नगर निगमों का करोड़ों रुपया केवल ट्रांसपोर्ट में खर्च हो जाता है। जिसे प्लांट लगाकर बचाया जा सकता है।