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दो वर्ष वेटर की नौकरी पर नहीं छोड़ी रिशांक ने कबड्डी

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दो वर्ष वेटर की नौकरी पर नहीं छोड़ी रिशांक ने कबड्डी
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यूपी योद्धा टीम के कप्तान और स्टार रेडर हैं रिशांक, 1.11 करोड़ की लगी बोली

संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। यूपी योद्धा टीम के कप्तान और स्टार रेडर रिशांक देवाडिगा ने 12वीं पास करने के बाद दो वर्ष तक मुंबई के पांच सितारा होटल में वेटर के रूप में काम किया था। घर की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए रिशांक ने नौकरी की और साथ ही कबड्डी की प्रैक्टिस भी जारी रखी। इस वर्ष रिशांक की यूपी योद्धा टीम ने 1.11 करोड़ में खेलने के लिए बोली लगाई थी।
अमर उजाला से बातचीत में रिशांक ने बताया कि बचपन में ही उनके पिता गुजर गए थे, जिसके बाद ब्यूटीशियन मां ने उन्हें व एक छोटी बहन को पालकर बड़ा किया है। मूलरूप से मैंगलोर के एक गांव निवासी रिशांक जन्म से ही मुंबई के सांताक्रूज क्षेत्र में रहते थे। आठ वर्ष की उम्र से ही कबड्डी खेलने वाले रिशांक का दसवीं पास करने के बाद मुंबई की टीम में चयन हो गया था। पिछले पांच से छह वर्षों से वह प्रो कबड्डी के साथ-साथ भारतीय कबड्डी टीम के प्रमुख रेडर में से एक हैं। इस बार वह यूपी योद्धा टीम को प्रो कबड्डी चैंपियन बने देखना चाहते हैं।
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भारतीय टीम में जगह बनाना आशीष का लक्ष्य
यूपी योद्धा टीम के लिए प्रदेश के सभी शहरों में हुए क्वालीफाइंग में दनकौर के चचूला निवासी आशीष नागर का चयन किया गया था। आशीष बताते हैं कि दो बार गाजियाबाद में क्वालीफाइंग में हिस्सा लेने के बाद उन्हें डिफेंडर के रूप में शामिल किया गया है। पिछले चार वर्षों से उन्होंने प्रोफेशनल कबड्डी खेलना शुरू किया था। वह गांव में ही प्रशिक्षक जितेंद्र नागर के सानिध्य में मिट्टी पर ही कबड्डी खेलते थे। अब दो वर्षों से अकादमी में खेलना शुरू किया था। अब उनका लक्ष्य प्रो कबड्डी में बेहतर प्रदर्शन कर भारतीय टीम में जगह बनाना है।
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यूपी योद्धा के डिफेंड की जान हैं जीवा व सचिन
कन्याकुमारी के जीवा कुमार 2010 में एशियन कप में स्वर्ण पदक लाने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा से कबड्डी खेलनी शुरू कर दी थी। वहीं, दूसरे डिफेंडर सचिन कुमार यूपी के बागपत जिले से हैं। सचिन वर्ष 2015 में यूपी से खिलाड़ी रहे हैं, जब 63 वर्ष के इतिहास में पहली बार यूपी ने नेशनल चैंपियनशिप जीती थी। वह 2010 से सेना में कार्यरत हैं। वहीं, यूपी योद्धा टीम के एक और स्टार रेडर प्रशांत राय कर्नाटक के पुत्तूर जिले से हैं। स्कूल के दिनों में प्रशांत को वेट लिफ्टिंग का शौक रहा। बाद में कबड्डी खिलाड़ियों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने कबड्डी को करियर बनाया।



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