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जबरन खाली करवाया अस्पताल, ओपीडी का वक्त निकलते ही हड़ताल खत्म

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डॉक्टर काम पर लौटे तो नर्सिंग अर्दली हड़ताल पर गए
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-दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में डॉक्टर और नर्सिंग अर्दली के बीच मारपीट का मामला
-कर्मचारियों की आपसी रार में मरीजों की मुसीबत बरकरार
-शाम चार बजे तक ओपीडी रही बंद, इमरजेंसी में भी मरीजों को नहीं मिला उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोकनायक अस्पताल में एक दिन पहले डॉक्टर और नर्सिंग अर्दली के बीच हुई मारपीट के मामले में हड़ताल के चलते सोमवार सुबह कहने को सिर्फ ओपीडी सेवाएं बंद रखीं गईं, लेकिन आपातकालीन वार्ड में भी मरीजों को दूसरे अस्पताल में इलाज कराने की लिखित सलाह डॉक्टर देते रहे। सिलसिला यहीं नहीं रुका, अस्पताल में मौजूदा मरीजों को भी रेफर कर दिया गया। इस बात की जानकारी अस्पताल प्रशासन से लेकर दिल्ली सरकार तक को थी। हालांकि अस्पताल प्रशासन की पहल पर डॉक्टरों ने शाम चार बजे बाद हड़ताल वापस ले ली। बदले में सुरक्षा के लिए उन्हें फिर से 48 बाउंसर उपलब्ध कराए गए। उधर, न्याय की गुहार लगाकर अस्पताल के नर्सिंग अर्दलियों ने दोपहर बाद हड़ताल की घोषणा कर दी।

डॉक्टरों की यह थी मांग
डॉक्टरों ने रविवार देर शाम हड़ताल की घोषणा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने सीसीटीवी की संख्या बढ़ाने, संस्था की तरफ से एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। इस पर अस्पताल ने एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही सुरक्षा के लिए 48 बाउंसर बुला लिए।
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तड़प उठे मरीज
सप्ताह के पहले ही दिन रेजिडेंट डॉक्टरों की इस हड़ताल से मरीज तड़प उठे। राजेंद्र नगर निवासी और ब्रेन हैमरेज के मरीज प्रदीप जैन करीब चार घंटे तक इलाज के इंतजार में एंबुलेंस में तड़पते रहे। बाद में निराश हो कर वह आरएमएल के लिए गए। वहीं, दिमागी टीबी की मरीज चंदर विहार निवासी 22 वर्षीय कोमल को हड़ताल की वजह से दवाएं नहीं मिल पाई। उसके माता-पिता के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि एक दिन और अस्पताल उसे लेकर कैसे आएं। वहीं, नरेला निवासी 43 वर्षीय रणबीर जो दिल की बीमारी की वजह से दो दिन से अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें दोपहर बाद जबरन एक सादे कागज पर यह लिखकर वार्ड से निकाल दिया कि अस्पताल में हड़ताल है।
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अब नर्सिंग अर्दलियों ने शुरू की हड़ताल
इस बीच डॉक्टर से मारपीट का आरोपी नर्सिंग अर्दली हासिम सामने आया। उसने आरोपी डॉक्टर पर पहले अभद्रता करने और धक्का देने के साथ बाद में घेर कर पीटने का आरोप लगाया। उसका कहना है कि एमएलसी के अनुसार उसके गले में रक्त का थक्का जमने की बात सामने आई है। आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया। एक एक्सरे के लिए उसे ढाई घंटे तक इंतजार कराया गया। यही नहीं, उसे एक घंटे में 13 पेन कीलर इंजेक्शन लगाए गए। हासिम के समर्थन में एक चश्मदीद महिला शाहीन भी सामने आई। जिसने डॉक्टरों द्वारा खुद पर भी मारपीट का आरोप लगाया है। दोनो ने पुलिस पर आरोप लगाया उन्हें सीसीटीवी के लिए मना किया जा रहा है लेकिन डॉक्टरों को वह सहज ही उपलब्ध है। इन मामलों पर अस्पताल प्रबंधन से साथ नहीं मिलने पर दोपहर बाद नर्सिंग अर्दलियों ने भी हड़ताल की घोषणा कर दी है।
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