दक्षिण पूर्वी दिल्ली स्थित पुष्पावती सिंघानिया अस्पताल एक बार फिर गरीब मरीजों की उपेक्षा को लेकर विवाद में है। कुछ समय से दिल्ली सरकार और अस्पताल के बीच ईडब्ल्यूएस वर्ग को लेकर रार चल रही है। अस्पताल के जीएम नवीन शर्मा का कहना है कि उनके पास किसी तरह की शिकायत नहीं आई है। न ही अस्पताल ईडब्ल्यूएस मरीजों के इलाज से मना करता है।
खानपुर निवासी आकाश का कहना है कि उनके 50 वर्षीय पिता प्रवीण कुमार कुछ समय से गाल ब्लॉडर में पथरी से परेशान थे। दर्द बढ़ने पर उन्हें पुष्पावती सिंघानिया अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने करीब 40 हजार रुपये इलाज में खर्च होने की संभावना बताई। आकाश का कहना है कि उन्होंने खुद को ईडब्ल्यूएस वर्ग के तहत बताया और अस्पताल में इसी वर्ग के तहत पिता का ऑपरेशन कराने की इच्छा जाहिर की।
अस्पताल ने उन्हें इस वर्ग की सुविधा देने से इंकार कर दिया। पिता की हालत देखते हुए उन्हें बिना ईडब्ल्यूएस वर्ग सुविधा के ही दाखिला लेना पड़ा। आकाश का आरोप है कि भर्ती करने के बाद शुक्रवार तक मरीज का ऑपरेशन नहीं किया गया। कारण पूछने पर डॉक्टरों ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। साथ ही कहा कि मरीज ऑपरेशन लायक नहीं है।
आकाश के मुताबिक, भर्ती करते समय डॉक्टरों ने कहा था कि इनकी तत्काल सर्जरी करनी होगी। इसके लिए अस्पताल ने उन्हें एक लाख नौ हजार रुपये का बिल थमा दिया है। शुरुआत में उन्हें 40 से 45 हजार रुपये का ही खर्चा बताया गया था। आकाश ने अस्पताल प्रबंधन से इसकी शिकायत की है। साथ ही अब वे मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अस्पताल ने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया है।