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खुला प्रचार खत्म, अब गणित का खेल शुरू

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खुला प्रचार खत्म, वोटों का गुणा-भाग शुरू
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- अंतिम दिन सभी संगठनों और उम्मीदवारों ने झोंकी ताकत, कैंपस में गहमा-गहमी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए उम्मीदवारों के लिए सोमवार को प्रचार का आखिरी दिन था। सभी संगठनों और उम्मीदवारों ने आखिरी दिन प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। उम्मीदवारों ने सुबह छह बजे से ही प्रचार अभियान शुरू कर दिया था। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की गतिविधियों के कारण कैंपस में काफी गहमा-गहमी बनी रही। अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस भी मुस्तैद थी। प्रचार समाप्ति के साथ ही संगठनों में कड़े मुकाबले की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
उम्मीदवारों ने प्रचार के आखिरी दिन बिना चैन की सांस लिए एक से दूसरे कैंपस के बीच खूब भाग-दौड़ की। पहले उम्मीदवार मॉर्निंग कॉलेजों में प्रचार करने पहुंचे। दोपहर को सभी कैंटीन और कैफे में जाकर प्रचार किया। शाम को उम्मीदवार बारी-बारी से ईवनिंग कॉलेजों में पहुंचे और वोट मांगे। इसके बावजूद अभियान खत्म नहीं हुआ। देर शाम सभी उम्मीदवारों ने हॉस्टलों में जाकर प्रचार किया। वे छात्र-छात्राओं से अपने-अपने पक्ष में मतदान की अपील करते दिखाई दिए।
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इसी के साथ उम्मीदवारों का खुला प्रचार भी औपचारिक तौर पर खत्म हो गया। अब सभी संगठन और उम्मीदवार अपने पक्ष वाले और विपक्षियों के वोटों का गुणा-भाग करने में जुट गए हैं। इसके तहत कोई किसी के समर्थकों को तोड़ने का प्रयास कर रहा है तो कोई समर्थकों से बेहतर ताल बिठाने की फिराक में है। जोड़-तोड़ का यह खेल मंगलवार तक ऐसे ही चलेगा। बुधवार को मतदान होना है।
जीत की संभावनाओं पर अटकलें
अब छात्रसंघ चुनाव में उतरे संगठन हर सीट पर जीत का आंकलन करने में जुट गए हैं। एनएसयूआई, एबीवीपी, आइसा-सीवाईएसएस सभी चारों सीटों पर जीत सुनिश्चित मान रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आइसा व सीवाईएसएस के गठबंधन के समय एनएसयूआई को लग रहा था कि उसे कहीं-न-कहीं नुकसान होगा। प्रचार केदौरान एनएसयूआई को लगा कि आइसा व सीवाईएसएस के गठबंधन से उन्हें नुकसान नहीं हो रहा। इसका कारण है कि दोनों की राजनीति अलग-अलग है। सूत्रों का कहना है कि एनएसयूआई अपने लिए चुनाव आसान मान रही है। यहां तक कि वह एबीवीपी से भी टक्कर नहीं मान रहा।
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उधर, एबीवीपी भी अपनी जीत सुनिश्चित मानकर चल रही है। संगठन के सूत्रों का मानना है कि माहौल उनके पक्ष में है। हालांकि वह अन्य संगठनों की कड़ी मेहनत को भी कम नहीं आंक रही। माना जा रहा है कि आइसा व सीवाईएसएस के गठबंधन से यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
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