नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने दिल्ली में भू-जल रिचार्ज की पुख्ता कार्ययोजना तैयार करने और कार्ययोजना को धरातल पर उतारने की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता वाली एक समिति गठित की है। समिति में दिल्ली जल बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण और क्षेत्र के संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को भी शामिल किया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश में कहा कि सिर्फ कार्ययोजना तैयार कर लेना काफी नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारा गया या नहीं इसकी निगरानी के लिए भी समिति का गठन होना जरूरी है। गठित समिति दो हफ्तों के बीच में अपना काम शुरू कर सकती है। पीठ ने कहा कि कार्ययोजना तैयार करने में हितधारकों के सुझावों को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, छह महीनों तक भू-जल रिचार्ज की उपलब्धता बढ़ाने की निगरानी करेगी। साथ ही शोधित जल के इस्तेमाल पर भी निर्णय लेगी। समिति न सिर्फ समयबद्ध तरीके से कार्ययोजना तैयार करेगी बल्कि उसे लागू कर समस्याओं के समाधान को भी सुनिश्चित करेगी। इस काम के लिए तकनीकी विशेषज्ञों का भी सुझाव ले सकती है।
पीठ ने दिल्ली के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह समिति को उसका काम करने के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराएंगे। इसके अलावा समिति को एक वेबसाइट भी बनानी होगी ताकि वह भू-जल रिचार्ज मामले में कार्ययोजना और उसको लागू करने संबंधी सूचनाओं को प्रकाशित कर सके। इसके अलावा समिति को शैक्षणिक संस्थाओं के साथ जुड़कर जागरूकता भी फैलानी होगी। साथ ही समिति पेयजल आपूर्ति की समस्याओं पर भी तात्कालिक निर्णय लेगी। पीठ ने कहा है कि समिति निश्चित अंतराल पर बैठक भी करेगी और अपनी रिपोर्ट ई-मेल के जरिये एनजीटी को भेजेगी।
एनजीटी ने हाल ही में दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि वह राष्ट्रीय राजधानी में अवैध भू-जल दोहन को न सिर्फ रोके बल्कि भू-जल रिचार्ज को लेकर भी पुख्ता कार्ययोजना तैयार करे।