जेवर में एयरपोर्ट के लिए जमीन देने को अब तक 1300 किसान राजी हो गए हैं। इनसे 503 हेक्टेयर जमीन मिल सकेगी। यह कुल जमीन का 42 प्रतिशत है। शुक्रवार को सहमति देने का आखिरी दिन है।
प्रथम चरण के निर्माण के लिए 1334 हेक्टेयर जमीन की दरकार है। इसमें 116 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। 1218 हेक्टेयर जमीन किसानों की सहमति से ली जानी है। अब तक 1300 किसानों ने 503 हेक्टेयर जमीन के लिए अपना राजीनामा दे दिया है। प्राधिकरण व प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक बृहस्पतिवार को 155 किसानों ने सहमति दी है।
शुक्रवार को मिलने वाली सहमति के बाद इस पर निर्णय हो सकता है कि जेवर में एयरपोर्ट बनेगा या नहीं। किशोरपुर, रोही, पारोही, दयानतपुर, बनवारीवास व रन्हेरा गांव की जमीन ली जानी है।
किसानों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण में चार गुने मुआवजे की मांग कर रहे किसानों ने बृहस्पतिवार को किशोरपुर गांव में पंचायत की। इसमें किसानों ने प्रत्येक गांव से दस लोगों की टीम बनाकर आगे की रणनीति बनाने का फैसला करते हुए प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजा है।
एयरपोर्ट में प्रभावित आठ गांव के किसानों ने किशोरपुर गांव में पंचायत की जिसमें 2300 व 2500 रुपये प्रतिवर्ग गज के मुआवजे को कम बताते हुए किसानों ने जमीन देने के लिए अन्य किसानों से सहमति न देने की अपील की। किसानों ने पंचायत में मौजूद किसानों से वार्ता कर अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए पत्र लिखा।
जिसमें 18 मई को प्रभावित आठ गांव को औद्योगिक क्षेत्र घोषित करने के पीछे जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की साजिश करार दिया। इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। किसानों ने मांग पूरी न होने पर 14 सितंबर से जिलाधिकारी कार्यालय पर धरने की चेतावनी दी है। किसानों ने पत्र को मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, प्राधिकरण के सीईओ व चेयरमैन को भी भेजा है।