दिल्ली विश्वविद्यालय में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत एमए इतिहास, एमए राजनीति शास्त्र कोर्स शैक्षिक मामलों की स्टैंडिंग कमेटी में पास नहीं हो सका है। बैठक में डीयू की प्रो नंदिनी सुंदर व जेएनयू की प्रो अर्चना प्रसाद की किताबों को इतिहास के एक पेपर में रेफ्रेंस बुक के तौर पर शामिल किए जाने को लेकर आपत्ति थी। ऐसे में कोर्स विभाग को वापस भेज दिया गया। अब विभाग इस मामले को देखेगा। डीयू शैक्षिक मामलों की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों ने इन किताबों को लेकर आपत्ति जताई थी।
मंगलवार रात समाप्त हुई शैक्षिक मामलों की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में प्रो नंदिनी सुंदर की किताब सब ऑर्टन एंड सॉवरिन एंड एंथ्रोपोलॉजिकल हिस्ट्री ऑफ बस्तर व प्रो अर्चना प्रसाद की पुस्तक अगेंस्ट इकोलॉजिकल रोमांटिसिज्म: वेरिएल्विन एंड मेकिंग ऑफ एन एंटी मॉडर्न ट्राइबल आईडेंटी को एमए इतिहास के एक पेपर में रेफरेंस बुक के तौर पर शामिल करने के लिए लाया गया था।
आपत्ति इस बात को लेकर थी कि प्रो नंदिनी की किताब नक्सलाइट का महिमा मंडन करती है। वहीं, अर्चना की किताब आदिवासियों के धर्म परिवर्तन को उचित बताती है। इन किताबों पर चर्चा के बाद सदस्यों ने आपत्ति की और इन्हें वापस लेने के लिए कहा। लिहाजा इस मामले को वापस इतिहास विभाग को भेज दिया गया। वहीं, एमए राजनीति शास्त्र कोर्स में ढांचागत समस्या के चलते इसे वापस विभाग को भेजा गया।