हेडिंग: जेवर में एयरपोर्ट के लिए आखिरी एनओसी जल्द
पर्यावरण मंत्रालय ने यीडा से मांगी रिपोर्ट, एयरपोर्ट के लिए सोलर प्लांट भी लगेगा
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। जेवर में एयरपोर्ट के लिए पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंत्रालय ने एयरपोर्ट की नोडल एजेंसी यीडा से कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसमें बिजली, सीवर, पानी, कूड़ा निस्तारण आदि से जुड़ा ब्योरा देने को कहा गया है। प्राधिकरण ने इन तथ्यों पर सलाहकार कंपनी पीडब्ल्यूसी से ब्योरा तैयार करा लिया है। इसे मंत्रालय की वेबसाइट पर जल्द ही अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद पर्यावरण एनओसी मिल जाएगी। एयरपोर्ट के लिए पर्यावरण के अलावा अन्य सभी एनओसी मिल चुकी है।
एयरपोर्ट के लिए सौर ऊर्जा और डेडिकेटेड पावर ग्रिड का इंतजाम रहेगा। जहांगीरपुर में 765 एमवीए का सबस्टेशन इसके लिए पर्याप्त रहेगा। इसके अलावा 9.5 हेक्टेयर में सौर ऊर्जा का प्लांट लगेगा। साथ ही, एयरपोर्ट की बिल्डिंग के ऊपर भी सौर ऊर्जा का प्लांट लगेगा। इसके ऊपर लगने वाली प्लेटें चमकीली नहीं होंगी। एयरपोर्ट के निर्माण में रोजाना नौ एमएलडी पानी की जरूरत होगी। यह पानी जेवर में जल वितरण करने वाली एजेंसी और आसपास के एसटीपी से लिया जाएगा। भूमिगत जल के इस्तेमाल का भी विकल्प है। जेवर में पैसेंजर व कार्गो एयरपोर्ट बनने हैं। इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग एसटीपी बनेंगे। दोनों 1.5 एमएलडी क्षमता के होंगे। एयरपोर्ट जब पूरा तैयार हो जाएगा तो 15 एमएलडी सीवरेज निकलेगा, जिसके निस्तारण का भी प्लान बनाने को कहा है। पहले चरण का निर्माण पूरा होने के बाद यहां प्रतिदिन छह टन कूड़ा निकलेगा, जबकि पूरा निर्माण होने पर 40 टन कूड़ा निकलने का अनुमान है। कूड़ा निस्तारण के लिए यहां पर प्लांट लगेगा। कूड़े को डंप किया जाएगा, ताकि भविष्य में दिक्कत न हो।
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पर्यावरण मंत्रालय ने एनओसी जारी करने से पहले कुछ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट तैयार करवा कर जल्द ही वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीद है कि इसके बाद एनओसी जारी हो जाएगी।
- डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण