मानहानि मामले में मेधा पाटकर पर जुर्माना
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने गवाह से जिरह पर स्थगन लगाने की मांग को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला केवीआईसी के अध्यक्ष वीके सक्सेना की मानहानि की याचिका से जुड़ा है।
अदालत में मेधा पाटकर ने कहा कि एक पत्रकार से जिरह करने के लिए उनके वकील उपलब्ध नहीं हैं। इस तर्क को देते हुए उन्होंने मामले को स्थगित करने की मांग की, जिसके बाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की सुविधा अनुसार तारीख तय कर दी थी, लेकिन उनके वकील पेश नहीं हुए, यह स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि गवाह (पत्रकार) ने सक्सेना के पक्ष में बयान दिए हैं। लिहाजा पाटकर को आदेश दिया कि वह गवाह (पत्रकार) को सात हजार रुपए का भुगतान करे। पाटकर और खादी ग्रामीण उद्योग आयोग (केवीआईसी) के प्रमुख सक्सेना के बीच वर्ष 2000 से कानूनी विवाद चल रहा है। पाटकर और एनबीए के खिलाफ विज्ञापन छपवाने के बाद पाटकर ने सक्सेना के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उस वक्त सक्सेना अहमदाबाद के एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रमुख थे। इसके जवाब में सक्सेना ने एक टीवी चैनल पर अपने खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए पाटकर के खिलाफ दो मामले दर्ज करा दिए और उनके खिलाफ मानहानिपूर्ण प्रेस बयान जारी किया।