मनजीत सिंह जीके पर यूबा सिटी में हमले के पीछे आईएसआई : कालका
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके पर कैलिफोर्निया के यूबा सिटी में हुए हमले के पीछे आईएसआई का हाथ बताया है। इस हमले को लेकर शिरोमणी अकाली दल दिल्ली इकाई के प्रभारी एवं राज्यसभा सदस्य बलविंदर सिंह भूंदड़ के नेतृत्व में हुई बैठक में कमेटी के सदस्यों ने हमले की निंदा की।
बैठक के बाद कालका ने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर कार्य करने वाले सिख फॉर जस्टिस का कार्यकर्ता साबी सिंह पहले ही धमकी दे चुका है। उन्होंने कहा कि इस कातिलाना हमले में सिख फॉर जस्टिस के कार्यकर्ता जसबीर सिंह दिल्ली व उनके पुत्र गगनदीप सिंह भी शामिल हैं। जसबीर सिंह ने 1984 सिख दंगों की मुख्य गवाह बीबी दर्शन कौर की गवाही बदलवाने के लिए कांग्रेस नेता एचकेएल भगत व जगदीश टाईटलर की तरफ से पैसे देने की पेशकश की थी। जिसके चलते जसबीर सिंह को तीन महीने की सजा भी हुई थी। कालका ने कहा कि आज के हमले से एक बात साबित हो गई है कि दिल्ली कमेटी द्वारा लड़ी जा रही 1984 की लड़ाई को कमजोर करने के लिए यह हमला कौम के कातिलों व आईएसआई एजेंटों ने मिलकर किया है। कालका ने इस हमले के दौरान दस्तार (पगड़ी) के अपमान पर भी चिंता जाहिर की।
-------
बादल के बयान की निंदा की
नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने बयान जारी कर कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब के साथ पंजाब में हुई बेअदबी पर रिपोर्ट पंजाब विधानसभा में सोमवार को पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट को लेकर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की बौखलाहट सामने आ रही है। विधानसभा में जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट पेश होने से पहले ही जस्टिस रणजीत सिंह के बारे में बादल ने बोलना शुरू कर दिया है। सरना ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल का ये कहना कि वे जस्टिस रणजीत सिंह को न तो जज मानते हैं और न ही सिख, यह घोर निंदनीय है। यह वक्तव्य देकर बादल भारतीय न्याय पालिका का अपमान ही नहीं बल्कि एक गुरसिख जज का भी अपमान किया है। उन्होंने कहा कि बादल परिवार सिर्फ अपने आप को सिख मानता है, जबकि वे खुद आरएसएस की विचारधारा वाले हैं। बादल पंजाब में अपनी सत्ता की बहाली की धमकियां जस्टिस रणजीत सिंह को दे रहा है। पूरे बादल परिवार को राजनीति से सन्यास के बारे में सोचना चाहिए। ब्यूरो