गुमशुदा की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता खराब
- दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि एफएसआर की गुणवत्ता केवल दो फीसदी
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। गुमशुदा बच्चों व महिलाओं की तलाश के लिए दिल्ली पुलिस जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है उसकी गुणवत्ता महज दो फीसदी है। यह जानकारी बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस की ओर से हाईकोर्ट को दी गई।
जस्टिस एस. मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस से कहा कि गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए एफआरएस का इस्तेमाल क्यों नहीं करती है। इसपर दिल्ली पुलिस के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए चेहरा पहचानने वाले जिस सॉफ्टवेयर (एफआरएस) का इस्तेमाल किया जा रहा है उसकी गुणवत्ता महज दो फीसदी है। कोर्ट को यह जानकारी एक गुमशुदा महिला की तलाश के लिए उसके भाई की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस व राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम ने प्लेसमेंट एजेंसी के कार्यालय पर अगस्त 2017 में छापा मारकर दस लोगों को मुक्त करवाया था। जिनमें पांच नाबालिग भी थे जिन्हें देश के कोने कोने से लाया गया था। पुलिस ने इस मामले में एक दंपति व एक अन्य महिला को गिरफ्तार किया था।