नोएडा में प्रस्तावित एयरपोर्ट की जमीन पर विवाद के बीच राजस्थान सरकार ने अलवर के लिए कोशिश तेज कर दी है। अलवर प्रशासन ने 12 सितंबर को लोक अदालत के जरिये किसानों से जमीन लेने की पहल की है। फंड उपलब्ध होने का ब्योरा भी दे दिया है। वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जेवर में जमीन पर स्थिति साफ करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया है। इसके बाद एयरपोर्ट अलवर में बनाने पर जोर रहेगा।
दरअसल, जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए 13 सौ हेक्टेयर जमीन की दरकार है। इसके लिए करीब नौ हजार किसानों से सहमति ली जानी है। डीएम बीएन सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन व यमुना प्राधिकरण की टीम प्रयासरत है, लेकिन अब भी काफी किसान सहमति देने से कतरा रहे हैं। अलवर के भिवाड़ी एरिया में पहले से ही कार्गो एयरपोर्ट प्रस्तावित है। अब इसे ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने की कोशिश तेज हो गई है। इसके लिए प्रशासन ने करीब 4000 हेक्टेयर जमीन का दावा किया है।
यहां जमीन के लिए करीब 1757 करोड़ रुपये की दरकार है, जिसका इंतजाम होने की बात कही गई है। सूत्र बताते हैं कि यहां के कोटकासिम व नीमराणा एरिया में जापानी कंपनियों ने बड़े पैमानेे पर निवेश कर रखा है। जापानी कंपनियों ने फंडिंग के भी संकेत दिए हैं। इसे देखते हुए अलवर में एयरपोर्ट को लेकर गतिविधि बढ़ गई है। अलवर प्रशासन ने जमीन के लिए 12 सितंबर को लोक अदालत के जरिये किसानों से सहमति लेने की कोशिश शुरू कर दी है।
बीच का रास्ता निकालने पर अटके किसान
एयरपोर्ट की जमीन पर अब भी सभी किसान सहमति देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। कुछ किसान बीच का रास्ता निकालने तो कुछ चार गुना मुआवजे पर अड़े हैं। डीएम ने किसानों से सोच-समझकर निर्णय लेने की बात कहकर बैठक खत्म कर दी।
तहसील व प्राधिकरण की टीम के साथ जेवर के रन्हेरा गांव पहुंचे डीएम ने किसानों से कहा कि आने वाली पीढ़ी के रोजगार के लिए किसान जमीन देने का फैसला लें। उन्होंने कहा कि सरकार का पक्ष सीधे किसानों के बीच रखने के लिए वे आए हैं। पहली बार सरकार ने जमीन के लिए डीएम को सीधे किसानों के घर जाकर वार्ता करने को भेजा है। एयरपोर्ट जैसा बड़ा प्रोजेक्ट छिन जाने के बाद दोबारा नहीं मिलेगा। इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि किसान एक-दो दिन में परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठक कर जमीन देने या न देने का फैसला करें। वहीं, काफी किसान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा लेने पर अड़े हुए हैं। एक किसान ने 33 सौ रुपये मुआवजा तय करने पर जमीन देने का प्रस्ताव रखा। एक अन्य किसान ने 27 सौ रुपये प्रति वर्गमीटर का प्रस्ताव रखा, जिस पर अन्य किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया।