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एनजीटी ने याची से कहा बैठक में रखें शिकायतें

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गाजियाबाद के लिए भी::::
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‘मेरठ मंडलायुक्त कौशांबी को दिलाएं प्रदूषण से मुक्ति’

- एनजीटी ने कारवां रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर दिया आदेश
- याची को भी बैठक में समस्याएं रखने को कहा, समाधान नहीं होने पर दोबारा सुनवाई का दिया आश्वासन

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। गाजियाबाद स्थित कौशांबी रिहायशी कॉलोनी में बस अड्डे के आसपास अतिक्रमण, 10 वर्ष से ज्यादा पुराने डीजल बसों का परिचालन, अवैध पार्किंग, कूड़े का निस्तारण जैसी समस्याओं का आदेश के बावजूद निपटान नहीं होने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने नाराजगी जताई है। इसके लिए एनजीटी ने मेरठ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। वहीं, आदेश दिया है कि मंडलायुक्त संबंधित प्राधिकरणों के साथ बैठक कर 24 सितंबर तक याची की शिकायतों का निवारण करें। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कौशांबी रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (कारवां) की ओर से पेश अध्यक्ष वीके मित्तल के मामले में यह आदेश दिया है।
पीठ ने याची वीके मित्तल को इस बैठक में अपनी शिकायत रखने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि यदि शिकायत का निवारण नहीं होता है या बैठक से याची संतुष्ट नहीं होता है तो वह एनजीटी में दोबारा अपनी शिकायत लेकर आ सकता है। कारवां की ओर से एनजीटी में गाजियाबाद के कौशांबी बस अड्डे के इर्द-गिर्द अतिक्रमण और डग्गामार वाहनों का जमावड़ा, अवैध पार्किंग, वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। याची वीके मित्तल की ओर से कहा गया था कि प्राधिकरणों की लापरवाही के कारण आवासीय कॉलोनियों को प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है।
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वहीं, मित्तल ने कहा कि दिल्ली की तरफ प्राधिकरणों की ओर से कार्रवाई की जा रही है जबकि यूपी में कोई कदम नहंी उठाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की ओर से एनजीटी में दाखिल किए हलफनामे के मुताबिक आनंद विहार बस अड्डे के तरफ 400 से अधिक डग्गामार वाहनों के चालान काटे गए हैं। वहीं अतिक्रमण और कूड़े-कचरे को लेकर भी कार्रवाई की गई है।
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