उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा के लिए--
पुरातत्व विभाग की नीतियों के खिलाफ कराया मुंडन
-ठेकेदारी प्रथा शुरू करने के लिए 30 साल पुराने कर्मचारियों को काम से हटाने का आरोप
- मांगे पूरी न होने पर अस्थायी कर्मचारी ऐतिहासिक स्मारकों पर जड़ेंगे ताले
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) में दशकों से काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एएसआई मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने काम से निकाले गए लोगों की नौकरी की बहाली करने की मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे ऐतिहासिक स्मारकों पर ताला जड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। विभाग की नीतियों के विरोध में लोगों ने मुख्यालय के बाहर मुंडन कराया। इस प्रदर्शन में दिल्ली के कर्मचारियों के अलावा उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के कर्मचारियों ने मुंडन कराया। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष देवराज भड़ाना ने कहा कि पिछले सात माह से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की कि उनका सात महीनों का वेतन 24 घंटों में दिया जाए और ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई की अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार मजदूरों का शोषण कर रहे हैं।
यूनियन के महामंत्री डॉ. दीपेंद्र चाहर ने आरोप लगाया कि एएसआई में नए अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती ठेकेदारों के द्वारा की जा रही और 25-30 साल पुराने कर्मचारियों को काम से निकाला जा रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि जिन कर्मचारियों को 1/30 की श्रेणी में रखा गया था उन्हें स्थायी किया जाए और जिन कर्मचारियों को 1/30 में नहीं रखा गया, उन्हें इस श्रेणी में शामिल किया जाए। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों को 21 हजार रुपए से कम वेतन मिल रहा है उन्हें ईएसआई और पीएफ की सुविधा प्रदान की जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो एएसई के विरोध में कर्मचारी देशभर में अधिकारियों के पुतले फूंकेंगे और ऐतिहासिक स्मारकों पर ताले लगाएंगे।