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अदालत ने राखी बिड़लान को चुनाव में नियम तोडने के आरोप से बरी किया

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राखी बिड़लान चुनाव में नियम तोड़ने के आरोपों से बरी
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2014 के चुनाव संबंधी नियमों के उल्लंघन , अदालत सबूतों के अभाव में कोर्ट ने दी राहत


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । अदालत ने साल 2014 के चुनाव संबंधी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले में दिल्ली विधानसभा की डिप्टी स्पीकर राखी बिड़लान को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने सबूतों के अभाव में बिड़लान को राहत प्रदान की है।
पटियाला हाउस कोर्ट के अडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट समर विशाल ने आप नेता को मामले में पुख्ता सबूतों के अभाव में रिप्रजेंटशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1951 की धारा 130 के आरोपों से बरी किया । वर्तमान में राखी बिड़लान मंगोलपुरी विधानसभा से आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक हैं।
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मामले में आम आदमी पार्टी के वकील मोहम्मद इरशाद ने तर्क रखा कि पुलिस ने इस मामले में बहुत देरी से कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया। अदालत ने सरकारी कर्मचारी के आदेश के उल्लंघन से जुड़ी आईपीसी की धारा 188 नहीं लगाई। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के प्रावधान के तहत आरोप तय किए । इस बाबत पुलिस ने आरोप साबित करने के लिए करीब छह गवा पेश किए, लेकिन किसी भी गवाह की गवाही पुख्ता साबित नहीं हुई। इसके आधार पर अदालत ने बिड़लान को आरोपमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
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ये है मामला
बिड़लान पर आरोप था कि साल 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान वह अपने इलाके के एक पोलिंग बूथ पर एक टोपी पहनकर पहुंचीं, जिसमें एक तरफ लिखा था कि मैं आम आदमी हूं और दूसरी तरफ लिखा था कि मुझे स्वराज चाहिए। इस दौरान पोलिंग बूथ पर मौजूद एक बीजेपी कार्यकर्ता ने चुनाव अधिकारियों से इसकी शिकायत की, जिनसे मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने महिला नेता के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 और रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1951 की धारा 130 के तहत केस दर्ज किया था।
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