अब कोर्स व फीस में आईआईटी दिल्ली-मुंबई खुद कर सकेंगे बदलाव
आईआईटी दिल्ली-मुंबई खुद फीस व कोर्स में कर सकेंगे बदलाव
21 अगस्त को काउंसिल की बैठक में अधिकार देने के फैसले पर लग सकती है मुहर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली और मुंबई अब अपनी मर्जी से फीस, कोर्स डिजाइन, सीट बढ़ाना व शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला कर सकेंगे। केंद्र सरकार आईआईटी दिल्ली और मुंबई को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (आईओई) का दर्जा मिलने के चलते आईआईटी काउंसिल की बजाय स्वयं फैसले लेने का अधिकार देने की तैयारी कर रही है। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मुंबई को अधिकार देने का फैसला 21 अगस्त की काउंसिल बैठक में होगा। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली और मुंबई को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (आईओई) का दर्जा मिल चुका है। यूजीसी के इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी रेगुलेशन 2017 के तहत आईओई का दर्जा मिलने के बाद संस्थान को फैसले लेने का अधिकार भी मिलेगा। यूजीसी जिन कॉलेज व विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता का दर्जा देती है, उन्हें भी फीस, सीट, शिक्षक से लेकर कोर्स डिजाइन का अधिकार मिलता है। उसी तर्ज पर आईओई का दर्जा मिलने वाले आईआईटी दिल्ली, मुंबई, मनीपाल यूनिवर्सिटी व रिलायंस का जियो इंस्टीट्यूट को फैसले लेने का अधिकार मिलेगा।
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सरकार के प्रस्ताव को नकारने का अधिकार रखती है काउंसिल
सभी 23 आईआईटी संस्थानों में फीस, सीट, कोर्स डिजाइन व शिक्षकों की नियुक्ति आदि सभी फैसले आईआईटी काउंसिल करती है। काउंसिल बैठक में ही आईआईटी से जुड़े मुद्दों पर फैसला होता है। इसके तहत आईआईटी में दाखिले के लिए आयोजित जेईई एडवांस की परीक्षा भी शामिल है। जेईई एडवांस की परीक्षा, प्रश्नपत्र, दिक्कतों व सुझावों के आधार पर आगामी दो सालों की परीक्षा पर फैसले भी होते हैं। गौरतलब है कि आईआईटी काउंसिल एक सशक्त व स्वायत्त बाडी है, जोकि केंद्र सरकार के प्रस्ताव को भी रद्द करने का अधिकार रखती है। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार के कई प्रस्तावों को काउंसिल ने नकार दिया था।
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भारतीयों की तर्ज पर हो विदेशी छात्रों की फीस
आईआईटी दिल्ली ने सरकार को प्रस्ताव दिया है कि बीटेक प्रोग्राम में भारतीय छात्रों की तर्ज पर विदेशी छात्रों से फीस ली जानी चाहिए। भारतीय छात्रों से दो लाख रुपये और विदेशी छात्रों से छह लाख रुपये सालाना फीस ली जाती है। फीस अधिक होने के चलते छात्र आईआईटी में आने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए भारतीय और विदेशी छात्रों से एक समान दो लाख रुपये सालाना फीस ली जानी चाहिए। यदि फीस कम होती है तो विदेशी छात्रों के आईआईटी में बीटेक प्रोग्राम की पढ़ाई करने की दिलचस्पी भी बढ़ेगी।