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दिल्ली नगर निगम के कागजों से ज्यादा अस्पताल में मरीज

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नगर निगमों के कागजों से ज्यादा अस्पताल में मरीज
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- दिल्ली सरकार के कई अस्पतालों में डेंगू, चिकनगुनिया आदि के मरीज भर्ती, कई जगह फीवर वार्ड फुल
- अस्पतालों की मानें तो हर दिन औसतन 50 से ज्यादा मरीजों का ले रहे सैंपल

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भले ही नगर निगम हर सप्ताह जारी अपनी रिपोर्ट में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियों पर काबू पाने का दावा कर रहा है। लेकिन अस्पतालों में जमीनी हकीकत कुछ और देखने को मिल रहा है। दिल्ली गेट स्थित लोकनायक अस्पताल में इन दिनों बुखार का वार्ड मरीजों से अटा पड़ा है। अनुमान है कि यहां हर दिन 30 से 40 मरीज तेज बुखार, उल्टी, चक्कर और शरीर में दर्द की समस्या लेकर भर्ती हो रहे हैं। वहीं, अस्पताल के ही एक टेक्रीशियन का कहना है कि हर दिन डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया को लेकर करीब 10 से 15 मरीजों के सैंपल लैब भेजे जा रहे हैं। सफदरजंग अस्पताल के अनुसार एक सप्ताह में करीब 380 मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जा चुके हैं। इनका परिणाम आना अभी बाकी है, लेकिन निगम रिपोर्ट को लेकर सफदरजंग अस्पताल के सूत्र भी भरोसा नहीं जता रहे। इन सबके बीच केंद्र सरकार के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में करीब 30 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। फीवर वार्ड में भी मरीजों की संख्या काफी है। जबकि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मरीजों को स्वाइन फ्लू के लिए आरक्षित बिस्तरों पर रखा जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि मच्छरों के नियंत्रण के बीच मरीजों की इतनी तादाद कैसे बढ़ रही है।
क्या कहती है निगम की रिपोर्ट
सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार 11 अगस्त तक दिल्ली में मलेरिया ग्रस्त मरीजों की संख्या 128 पहुंच चुकी है। जबकि वर्ष 2017 में 577, 2016 में 454, 2015 में 359 और वर्ष 2014 में 201 मरीज मलेरिया से बीमार पड़े थे। डेंगू की बात करें तो दिल्ली में इस साल 64 मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। अब तक डेंगू से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। दिल्ली में सर्वाधिक डेंगू मरीज वर्ष 2015 में 15867 दर्ज किए थे। इनके अलावा चिकनगुनिया के 41 मरीज भर्ती हुए हैं। साल 2016 में सर्वाधिक 7760 लोग चिकनगुनिया से पीड़ित हुए थे।
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10 साल में सबसे कम मरीज
दावा है कि मच्छरों पर इस साल इतना नियंत्रण रखा गया है, जितना 10 वर्षों में नहीं हुआ। वर्ष 2008 से 2017 तक डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों ने हर वर्ष हजारों लोगों को बीमार किया और कई की मौत के कारण भी बनीं।
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