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ओपन स्कूल

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ओपन स्कूल से दसवीं पास छात्रों को
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दाखिला न देने पर सरकार को फटकार
-स्कूलों ने कम अंक व अधिक आयु के आधार पर नहीं दिया दाखिला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से दसवीं पास करने वाले दो छात्रों को 11वीं कक्षा में दाखिला न देने पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सरकारी स्कूल ने दसवीं में कम अंक होने का हवाला देते हुए11वीं में दाखिला देने से मना कर दिया था।
जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल ने छात्रों को शिक्षा से बाहर रखने की नीति अपनाने पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता से कहा, वह सरकार से पूछ कर बताएं कि छात्रों को सरकारी स्कूल में दाखिला क्यों नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने यह निर्देश रिया बंसल व तुषार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याचिका पर सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि सरकारी स्कूल छात्रों को दाखिला देने में सामंती सोच अपना रहे हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी। पीड़ित छात्रों ने अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के जरिये याचिका दायर कर शिक्षा विभाग के 15 मई 2018 के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि इसके कारण उन्हें किसी भी सरकारी स्कूल में दाखिला नहीं मिल पाया। इस आदेश के मुताबिक एनआईओएस से दसवीं में 55 फीसदी अंक व 17 साल से कम उम्र के छात्रों को ही सरकारी स्कूल में 11वीं दाखिला मिल सकता है।
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कोर्ट ने यह तथ्य सामने आने के बाद कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा अगर सरकारी स्कूल उन्हें दाखिला देने से इनकार कर देंगे तो वह पढ़ने कहां जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि 11वीं में दाखिला लेने के लिए 17 साल की आयु सीमा कैसे तय की जा सकती है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील से पूछा क्या सरकार शिक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा निर्धारित कर सकती है।


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