हिंडन को प्रदूषित करने को लेकर एनजीटी ने 32 फैक्ट्रियों को बंद करने व एफआईआर दर्ज कराने के सख्त आदेश जारी करने के बाद प्रदूषण विभाग ने इन्हें नोटिस भी भेज दिए हैं। इस कार्रवाई को लेकर जिले के कारोबारियों में गुस्सा है। कारोबारियों ने चेतावनी दी कि अगर उद्योगपतियों का ऐसे ही उत्पीड़न होता रहा तो वह जिला छोड़ने को विवश हो जाएंगे।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ग्रेनो के चेयरमैन एसपी शर्मा ने प्रेसवार्ता में बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के उद्योगों को बढ़ावा देने के प्रयास अब छलावा लगने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के राजस्व संग्रह में सबसे अधिक योगदान गौतमबुद्ध नगर जिले के उद्योगों का रहता है। इसके अलावा जिले के उद्योगों से ही लाखों लोगों का रोजगार भी जुड़ा हुआ है। एनजीटी के निर्देशों के बाद प्रदूषण विभाग की कार्रवाई एकतरफा है।
इसमें कारोबारियों का पक्ष जानने का प्रयास ही नहीं किया गया। एक तरफ राज्य सरकार कार्यालय आदेश 26 जुलाई 2018 के माध्यम से सहमति की वैधता बढ़ाकर दो से पांच वर्ष कर रही है। दूसरी तरफ प्रदूषण विभाग के तानाशाही रवैये के बाद जिले में कंपनियां बंद होनी शुरू हो गईं हैं, जो नहीं हुईं हैं वह आने वाले समय में जिला छोड़ने के लिए विवश हो सकती हैं। कारोबारियों ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार को इस मामले में सीधी निगरानी का समस्या का निस्तारण करना चाहिए। इसके अलावा जिलाधिकारी, जिला उद्योग केंद्र आदि से भी समस्या के निस्तारण का अनुरोध किया जा रहा है।
आज सीएम के सामने रखेंगे समस्या
एसपी शर्मा ने बताया कि शनिवार को अलीगढ़ में उनकी एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिरकत करेंगे। जिले से भी 35 कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम में जाएगा और अपनी समस्याओं को रखकर समाधान का प्रयास करेगा।
इन दो कारणों से भी है कारोबारियों में आक्रोश
न निकासी न आपूर्ति, जूते हाथ में लेकर फैक्ट्री जाते हैं
कारोबारियों ने अपनी समस्याएं बताते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में प्राधिकरण ने न तो सीवर लाइन की व्यवस्था की है और न ही पानी की आपूर्ति का बंदोबस्त किया है। प्राधिकरण लाइन होने का दावा करता है, लेकिन आज तक पानी की आपूर्ति नहीं हुई। ऐसे में फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी कहां जाए। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र में जल दोहन पर भी रोक है, ऐसे में पानी का कैसे और कहां से बंदोबस्त हो। मामूली सी बारिश में औद्योगिक क्षेत्र में कीचड़ और जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है और कारोबारी अपनी फैक्ट्री या कंपनी में जूते हाथ में लेकर जाने को विवश होते हैं। इसके अलावा कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
पेनल्टी वसूलते हैं लेकिन ये रकम खर्च कहां पर करते हैं
कारोबारियों ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मामूली से कमी मिलने पर या शिकायत होने पर उनसे पेनाल्टी वसूलता है, लेकिन यह आज तक पता नहीं चल पाया कि वसूली गई पेनाल्टी की रकम को खर्च कहां किया जाता है। अगर इस रकम को कूड़ा निस्तारण, सीवर लाइन बनाने या पानी आपूर्ति करने में खर्च किया जाता तो समस्या का निस्तारण हो सकता था। इसके अलावा कारोबारियों ने मेंटेनेंस चार्ज लिया जाता है, लेकिन सुविधाओं पर खर्च नहीं किया जाता।