मिथिला मधुर सावन महोत्सव में दिखी परंपराओं की झलक
- सांस्कृतिक धुनों में जमकर थिरके लोग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में अखिल भारतीय मिथिला संघ की ओर से पहली बार मधु श्रावणी पर्व, मिथिला मधुर सावन महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली और आसपास के राज्यों की महिलाओं ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर, संस्कार और परंपराओं की मनोरम प्रस्तुति पेश की।
इस मौके पर अखिल भारतीय मिथिला संघ के अध्यक्ष विजय चंद्र झा ने कहा कि मधु श्रावणी मिथिला का पर्व है जो नव विवाहिता तेरह दिन तक श्रावण कृष्णपक्ष की पंचमी से प्रारंभ करती हैं। यह नेह, सौंदर्य, और आत्मिक समर्पण का पर्व है। पुरुष-प्रकृति, लोक-शास्त्र, संस्कृति-पर्यावरण के बीच तारतम्य स्थापित करता है। लड़की को सुघड़ स्त्री बनाता है। यह पर्व तीन भागों में विभक्त है: पहला अरिपन अथवा तांत्रिक परंपरा से पूजास्थल का निर्माण एवं नित्य पूजा, दूसरा कथा वाचिका से प्रतिदिन कथा सुनाय, तीसरा अंतिम दिन की पूजा, तत्पश्चात कुंवारी लड़कियों और सुमंगलियों का भोजन।
मधुश्रावणी में लोक और शास्त्र, पुरुष और प्रकृति के अवयव जैसे पानी, नदी, जल, वृक्ष, फूल-फलय जीव-जंतु, सांप, कीड़ा, धरती-आकाश आदि के बीच कैसे सामंजस्य स्थापित करते हुए सबके साथ जियें, उसकी व्यवहारिक शिक्षा दी जाती है।
कार्यक्रम में मधु श्रावणी पूजन, पुष्प क्रीड़ा, मैथिली गीत संगीत सहित कई आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इसके उपरांत मिथिला के पारंपरिक मिष्ठान अल्पाहार के साथ मधु श्रावणी पर्व मिथिला मधुर सावन महोत्सव का समापन हुआ। इस महोत्सव में लोग जमकर थिरके।