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हाईकोर्ट के नये ब्लॉक का उद्घाटन

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‘मैं अगले जन्म में दिल्ली हाईकोर्ट का जज बनना चाहूंगा’
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- चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने प्रशंसा करते हुए व्यक्त की भावना
- हाईकोर्ट के नए ब्लॉक का चीफ जस्टिस ने किया उद्घाटन
- केजरीवाल ने कार्यपालिका व विधायिका के संघर्ष में न्याय पालिका की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अगर मुझे अगला जन्म मिलेगा तो मैं भगवान से प्रार्थना करूंगा कि मुझे दिल्ली हाईकोर्ट का जज बनाना। कुछ इस तरह मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट के प्रति अपने स्नेह का बखान किया। चीफ जस्टिस मिश्रा दिल्ली हाईकोर्ट के नए ब्लॉक भवन के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। इस मौके पर दिल्ली हाईकोर्ट के नए ब्लॉक के निर्माण की स्मृति में एक पुस्तक का विमोचन भी उन्होंने किया।
विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट सामाजिक सरोकार के कई मुद्दों पर संज्ञान लेने में हमेशा आगे रहा है और यहां से कई बेहतर जज निकले हैं। हाईकोर्ट का नया ब्लॉक एक खूबसूरत भवन है और न्याय का नया चेहरा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा अन्य हाईकोर्ट को दिल्ली हाईकोर्ट का अनुकरण करना चाहिए न कि उससे किसी तरह की जलन होनी चाहिए।
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इस मौके पर दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के बीच की तल्खी भी साफ नजर आई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इशारों-इशारों में सरकार व उपराज्यपाल की शक्तियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र कर दिया। केजरीवाल ने कहा कार्यपालिका व विधायिका के बीच जब भी संघर्ष होता है तो न्याय पालिका ऐसे समय में महत्वपूर्ण फैसले देकर लगाम लगाती है। ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान न्याय पालिका पर भारी दबाव रहता है। इसके बाद भी न्याय पालिका अपना काम निष्पक्षता से करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा न्याय पालिका की स्वतंत्रता के लिए संसाधनों की बेहद जरूरत होती है और नया भवन इसकी जरूरतों को पूरा करेगा। दिल्ली हमेशा की तरह न्याय पालिका को स्वतंत्र रखने की पक्षधर रही है और न्याय पालिका को सुचारु संचालन के लिए हर तरह की वित्तीय सहायता के लिए तैयार है।
केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने निशाना साधते हुए कहा कि वकीलों व जजों के बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन वह सार्वजनिक नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने पिछली 40 सालों की सरकारों के मुकाबले सबसे ज्यादा जज हाईकोर्ट में नियुक्त किए हैं और आगे भी जजों की नियुक्ति का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा नौजवान वकीलों को भी जज बनने पर विचार करना चाहिए। हालांकि वकील के तौर पर उनकी कमाई व जज के तौर पर उनके वेतन की कोई तुलना नहीं है लेकिन जज बनने के बाद वह गर्व के साथ अपना योगदान दे सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कीर्ति उप्पल ने कहा कि हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी है और कोर्ट केवल 50 फीसदी जजों के साथ काम कर रही है। इस बारे में खुद कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल अपनी चिंता व्यक्त करते हुए जजों की नियुक्ति की मांग कर चुकी हैं। इसलिए सरकार व कानून मंत्री को इस ओर ध्यान देना चाहिए। हाईकोर्ट बार में अनेकों काबिल वकील हैं जो हाईकोर्ट में जज बन सकते हैं।
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इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज एनवी रमन्ना, जस्टिस एके सीकरी, मदन बी लोकुर, संजय कृष्ण कौल, कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व जस्टिस एस. रविंद्र भट ने अपने विचार व्यक्त किए। इन लोगों ने कहा हालांकि यहां पर कामर्शियल मामले सुने जाएंगे लेकिन तब भी इसका फायदा होगा। यह कोर्ट लिटिगेंट फ्रेंडली है। पूरे देश में इस तरह की कोर्ट बनाई जाएं।
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