हेडिंग: ग्रीनबे व एसडीएस से 80 एकड़ जमीन वापस लेगा यीडा
सबहेड: खरीदारों को पजेशन व अपना वैसा वसूलेगा प्राधिकरण
को-डेवलपर लाकर प्रोजेक्ट पूरा कराएगा प्राधिकरण
फंड डायवर्जन करने पर पहले से ही दर्ज है मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। खरीदारों को पजेशन न देने और प्राधिकरण का पैसा न लौटाने पर यमुना प्राधिकरण ने ग्रीनबे व एसडीएस बिल्डर से 80 एकड़ जमीन वापस लेने का फैसला किया है। इसमें को-डेवलपर लाकर प्राधिकरण प्रोजेक्ट को पूरा कराएगा। साथ ही अपने पैसे की भी भरपाई करेगा। सीईओ ने जमीन वापस लेने के लिए मंजूरी दे दी है।
दरअसल, बसपा शासनकाल में ग्रीनबे इंफ्रास्ट्रक्चर को 22डी में 100 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। कंपनी ने प्लॉट व फ्लैट की योजना लांच की। खरीदारों से पैसे ले लिए। बिल्डर ने प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय 173.10 करोड़ रुपये अन्य जगह खर्च कर दिए। प्रोजेक्ट को पूरा नहीं किया, जिससे खरीदारों को पजेशन नहीं मिल सका। प्राधिकरण की किस्तें भी जमा नहीं की। इस पर प्राधिकरण ने बिल्डर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी थी। अब उससे 40 एकड़ जमीन वापस ली जा रही है। इस पर प्राधिकरण का 380 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, एसडीएस इंफ्राकॉन को सेक्टर 26ए में 100 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। बिल्डर ने प्लॉट व फ्लैट की स्कीम लांच कर खरीदारों से काफी पैसे ले लिए, लेकिन न तो प्राधिकरण का पैसा दिया और न ही प्रोजेक्ट को पूरा किया। इस पर प्राधिकरण का 279 करोड़ रुपये बकाया हैं। यीडा के मुताबिक, एसडीएस ने 1389 प्लॉट बेचे हैं और ग्रीनबे ने 635 प्लॉट बेचकर खरीदारों का पैसा फंसा दिया है।
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दोनों ही बिल्डरों से 40-40 एकड़ जमीन वापस ली जाएगी। इसे बिड के जरिये को-डेवलपर को आवंटित किया जाएगा। वह बिल्डर ही प्रोजेक्ट को पूरा करेगा और जमीन आवंटन के एवज में प्राधिकरण के पैसे की भी इसी जमीन से भरपाई हो जाएगी। इस बाबत को अधीनस्थों को निर्देश दे दिए गए हैं।
- डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण
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पुलिस ने खुद से बदलकर हल्की कर दीं धाराएं
यीडा ने गंभीर धाराओं में दर्ज कराया था मुकदमा
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने 27 जून को दो बिल्डरों ग्रीनबे इंफ्रास्ट्रक्चर व एसडीएस इंफ्राकॉन के खिलाफ कासना कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। दोनों बिल्डरों पर कंपनी एक्ट की धारा 74, 75 व 447 और भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 420, 409, 467, 468 व 471 में मुकदमा दर्ज कराया था। धारा 74 के तहत अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, धारा 75 के तहत 25 लाख से दो करोड़ रुपये तक जुर्माना व सात साल सजा का प्रावधान है, लेकिन पुलिस ने एफआईआर में कंपनी एक्ट की धारा 59 व 68 लगा दी है, जिसमें सजा भी कम है और अधिकतम पांच लाख रुपये तक जुर्माने के प्रावधान है। इस बाबत पुलिस की तरफ से यीडा के उप निरीक्षक को पत्र भेजा गया, जिस पर यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने कड़ी नाराजगी जताते हुए डीजीपी को पत्र भेजा है। बता दें कि खरीदारों से मिले पैसे को उसी प्रोजेक्ट में न लगाकर कहीं और खर्च करने के चलते प्राधिकरण ने एफआईआर दर्ज कराई थी।