आवारा कुत्तों से निपटने के मामले में दोहरा मापदंड अपना रहे पार्षद
नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के मामले में पार्षदों का तर्क अजीबोगरीब सामने आ रहा है। एक ओर पार्षद आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा उठाते हुए उनकी आबादी बढ़ने से रोकने की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे अपने इलाके में कुत्तों की नसबंदी सेंटर खोलने का विरोध कर रहे हैं। राजधानी में आवारा कुत्तों को जान से माने पर प्रतिबंध है। उनकी आबादी कम करने के लिए उनकी नसंबदी करने का ही प्रावधान है। इतना ही नहीं, आवारों कुत्तों को नसबंदी के बाद उसी इलाके में छोड़ने की शर्त है, जहां उसको उठाया गया था। मोती नगर इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या अधिक होने के चलते नगर निगम ने कर्मपूरा स्थित अपने खाली पड़े एक स्कूल में उनकी नसबंदी सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया था, मगर अब इलाके के पार्षद नसबंदी सेंटर खोलने का विरोध कर रहे हैं। पार्षदों ने तर्क दिया है कि नसंबदी सेंटर खोलने से लोगों में आक्रोश है और वे इसके परिचालन को लेकर सहमत नहीं है। पार्षदों ने कहा है कि इस स्कूल में बुजुर्गों के लिए मनोरंजन केंद्र खोला जाए। ब्यूरो