डॉक्टरों को कैंसर की पहचान के गुर सिखाएंगे वैज्ञानिक
- राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान ने बनाया मॉडल
- अगले माह से देश भर के डॉक्टरों के लिए शुरू होगा कोर्स
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। समय से कैंसर की पहचान कर लोगों को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने नया मॉडल तैयार की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से देश के डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की स्थापना के बाद अब कैंसर की जांच की सुविधा इन सेंटरों पर उपलब्ध कराने की योजना है। इस बीमारी की जांच के गुर डॉक्टरों को वैज्ञानिक सिखाएंगे। इसके तहत दांतों का उपचार करने वाले बीडीएस डिग्री धारक डेंटिस्ट को फिलहाल प्रशिक्षित किया जाएगा। दो माह बाद अन्य डॉक्टरों को भी इसकी जानकारी दी जाएगी।
राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान केंद्र और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मिलकर मॉडल तैयार किया है। इसके तहत देश भर के इच्छुक डेंटिस्ट (दंत चिकित्सकों) को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। अगले माह से यह सुविधा शुरू हो जाएगी। सरकार हेल्थ एंड वेलनेस केंद्रों पर सर्वाइकल, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के इन केंद्रों पर इस तरह की जांच के लिए विशेषज्ञों का होना जरूरी है। इसीलिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
आईसीएमआर के एक वैज्ञानिक ने बताया कि 14 सप्ताह के लिए प्रशिक्षण मॉडल बनाया गया है। सप्ताह में एक दिन डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद बाकायदा उन्हें एक सर्टिफिकेट भी मिलेगा। ताकि आधिकारिक रुप से वे कैंसर की जांच के लिए मान्य हो सकें। दांतों के डॉक्टरों को ओरल कैंसर से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी।