डूसू अध्यक्ष की कुर्सी छिनी, कुर्सी जाने का असर नहीं
- अगले माह डूसू चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही पुराना डूसू हो जाएगा भंग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष रॉकी तुषीद की कुर्सी हाईकोर्ट ने भले ही छीन ली हो लेकिन कुर्सी जाने का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अगले माह डूसू चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी। इस अधिसूचना के जारी होते ही पुराना डूसू भंग हो जाएगा। सितंबर के दूसरे सप्ताह तक डूसू के नए पदाधिकारी चुन लिए जाएंगे। इस तरह से रॉकी तुषीद ने अपना कार्यकाल लगभग पूरा कर लिया है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे या नहीं, इस पर उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।
हाईकोर्ट ने रॉकी तुषीद की याचिका को खारिज करते हुए उसे चुनाव के लिए अयोग्य करार दिया है। कोर्ट का यह फैसला तब आया है, जब रॉकी का कार्यकाल लगभग पूरा होने वाला है। ऐसे में रॉकी की उम्मीदवारी रद्द होने पर भी उसे ज्यादा नुकसान नहीं होगा। केवल उसका नाम डूसू अध्यक्षों की सूची से हट जाएगा। बीते सितंबर में डूसू चुनाव से ठीक पहले रॉकी तुषीद को कोर्ट ने चुनाव लड़ने की बड़ी राहत दी थी। राहत मिलने के बाद एनएसयूआई ने रॉकी को अध्यक्ष पद के लिए डूसू के चुनावी दंगल में उतारा था। उन्होंने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी। कोर्ट के फैसले के बाद रॉकी सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे या नहीं यह जानने के लिए उन्हें लगातार फोन किए गए लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। उधर, एबीवीपी ने उनकी उम्मीदवारी रद्द होने को अपनी बड़ी जीत बताया।
एबीवीपी का कहना है कि डीयू प्रशासन ने एबीवीपी की शिकायत पर एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रॉकी तुषीद का नामांकन रद्द कर दिया था। जिसके बाद एनएसयूआई द्वारा कोर्ट को दिए गए गलत तथ्यों के आधार पर उसको राहत मिली लेकिन अभाविप ने एनएसयूआई द्वारा किए गए इस फर्जीवाडे़ से जुड़े सही तथ्यों को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखा था। जिसके बाद शुक्रवार को हाईकोर्ट ने रॉकी तुषीद के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में नामांकन को रद्द कर दिया है।
एबीवीपी के प्रदेश मंत्री भरत खटाना ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने रॉकी को फर्जी तरीके से प्रवेश दिया। साथ ही उस पर आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी डूसू चुनाव लड़ा। डूसू महासचिव महामेधा नागर ने कहा सत्य को सामने लाने के लिए एबीवीपी बीते 10 माह से संघर्ष कर रही थी।