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दंपति ने बिल्डर पर कार्रवाई को किए हैं 5 हजार ट्विट

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बिल्डर पर कार्रवाई के लिए दंपती ने किए 5 हजार ट्वीट
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दबा दी जातीं हैं ग्रेनो वेस्ट में बिल्डरों व कॉलोनाइजर की शिकायत

अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली क्षेत्र में बिल्डर व ठेकेदारों की लापरवाही की ढेरों शिकायत दबा दी जातीं हैं। पीड़ित खरीदार विभिन्न माध्यमों से शिकायत करते हैं, लेकिन लंबे समय तक उनकी शिकायतें दबी रहती हैं। कड़े प्रयास के बाद अगर पुलिस एफआईआर दर्ज कर लेती है, तो बिल्डर को गिरफ्तारी नहीं करती। अन्य विभागों के अधिकारियों का भी लगभग ऐसा ही हाल रहता है, जिसके चलते ट्विटर और सीएम पोर्टल आदि पर लगातार शिकायतें होती रहती हैं।
शाहबेरी निवासी दंपती सचिन राघव और नेहा सिंह का हादसाग्रस्त बिल्डिंग से चार सौ मीटर दूरी पर फ्लैट है। उन्होंने एक बिल्डर के खिलाफ बिसरख कोतवाली में दस माह पहले शिकायत की थी। आरोप है कि प्राधिकरण की स्वीकृत भूमि बताकर उन्हें फ्लैट बेचा गया। इस संबंध में प्राधिकरण अधिकारियों से भी पूछताछ की गई, तो उन्होंने भी सही बताकर फ्लैट खरीदने की सलाह दी थी। पुलिस उन्हें कई माह तक टरकाती रही और शिकायत दर्ज नहीं की। बाद में एसएसपी से शिकायत करने के बाद मामले में एफआईआर तो दर्ज कर ली गई, लेकिन अब तक नामजद बिल्डर की गिरफ्तारी नहीं की गई।
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सचिन राघव ने बताया कि आरोपी पर कार्रवाई के लिए वह अब तक पांच हजार से अधिक ट्वीट अधिकारियों को कर चुके हैं। इसके अलावा डेढ़ सौ शिकायतें रजिस्ट्रियों के माध्यम से कई अधिकारियों, कई विभागों, महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग आदि से की हैं, लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई। जिस बिल्डर पर कार्रवाई के लिए दंपती ने ट्वीट किए हैं, हादसे के बाद उसके बैनर को एक कर्मचारी कार्रवाई के डर से हटाता नजर आया।
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पोर्टल पर भी शिकायत
निर्मल कुमार नाम के व्यक्ति ने भी आईजीआरएस पोर्टल पर शाहबेरी गांव में अवैध निर्माण की शिकायत 27 मार्च को की है, लेकिन कोई कार्रवाई या सुनवाई नहीं हुई। यह हादसा जहां हुआ, उसे साईं गार्डन कॉलोनी के नाम से जाना जाता है। यहां के आरडब्ल्यूए शाहबेरी में किए जा रहे अवैध निर्माण की शिकायत 23 जून को जिलाधिकारी कार्यालय में की। इसे सीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को अग्रसित किया गया। इसके अलावा इस तरह की कई शिकायतें अधिकारियों से की गई, लेकिन इन सब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और कार्रवाई की जाती, तो शायद इतने दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।


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