बाल मरीजों के लिए घरेलू
बढ़ा स्वास्थ्य सेवा का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बीमार पड़ने पर किसी को भी दवा के साथ देखभाल की जरूरत पड़ती है। आम तौर पर बीमार के परिजन ही देखभाल करते हैं, लेकिन छोटे होते परिवारों और महानगरों की भागमभाग में अक्सर बुजुर्ग और बच्चे देखभाल से महरूम हो जाते हैं। ऐसे में देखभाल के लिए घरेलू स्वास्थ्य सेवा के नाम पर किसी नर्स या सहयोगी को घर पर रखा जाता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कुछ समय में इस सेवा को लेने वालों में बच्चों की संख्या 70 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ी है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं का बाजार वर्ष 2016 में 3.20 अरब डॉलर का था, जो वर्ष 2018 में बढ़कर 4.46 अरब डॉलर का होने की उम्मीद है। वर्ष 2020 में इसके 6.21 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। पोर्टिया मेडिकल की मीना गणेश के अनुसार, इस सेवा को लेने वालों में 14 वर्ष से कम उम्र के मरीजों की संख्या सात प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष के कुल मरीजों के अनुपात में 1.3 गुना (70 प्रतिशत) ज्यादा है।