स्वामी सानंद की जान बचाने को राजेंद्र सिंह ने लगाई प्रधानमंत्री से गुहार
- 22 दिन से अनशन कर रहे स्वामी को बताया देश का सबसे बड़ा नदी विज्ञानी
- सहायक नदियों पर निर्माणाधीन बांधों को रद्द करने की मांग मानने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पहले मेंबर सेक्रेटरी व आईआईटी प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद की जान बचाने के लिये जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। स्वामी सानंद गंगा को अविरल व निर्मल बनाने की मांग को लेकर पिछले 22 दिनों से आमरण अनशन पर हैं।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राजेंद्र सिंह ने कहा है कि स्वामी की जान बचाने के लिये मंदाकिनी, अलकनंदा व पिंडर जैसी गंगा की सहायक नदियों के निर्माणाधीन व प्रस्तावित बांधों को रद्द करने वाली उनकी मांग मान लेनी चाहिए। वहीं, गंगा के जल ग्रहण क्षेत्र को पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र घोषित करना भी जरूरी है। इसके अलावा गंगा भक्तों के परिषद का भी गठन होना चाहिए।
सिंह ने आगे लिखा कि प्रस्तावित गंगा अधिनियम 2012 के ड्राफ्ट पर संसद में तुरंत चर्चा कराकर पास किया जाए। उन्होंने पीएम को आगाह भी किया अगर इस काम में देरी हुई तो देश के सबसे बड़े नदी विज्ञानी का प्राणांत हो जायेगा। सिर्फ वही देश के इकलौते वैज्ञानिक हैं, जो गंगा की बीमारी को भी समझते हैं और उसकी सर्वोत्तम चिकित्सा करने की क्षमता भी रखते हैं।
अपने पत्र में सिंह ने याद दिलाया है कि पूर्व की यूपीए सरकार ने भागीरथी पर निर्माणाधीन लुहारी नागपाला, पलामनेरी व भैरों घाटी परियोजना को रोक दिया था। वहीं, दूसरी धाराओं पर प्रस्तावित करीब 250 बांधों पर रोक लगाई थी। जबकि गंगोत्री से उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी को पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र भी घोषित किया था।
गंगा पर प्रधानमंत्री की अनदेखी से नाराज स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर हैं। फिलहाल उन्हें ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उनका अनशन जारी है।