उत्तराखंड और मुरादाबाद समेत अन्य केंद्रों के ध्यानार्थ
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ग्रेनो में 16 से लगेगा फैशन ज्वेलरी और गारमेंट का मेला
- एक्सपो मार्ट में 18 जुलाई तक चलेगा 11वां इंडियन फैशन ज्वेलरी और एसेसरीज शो
- देशभर से 250 कंपनियां अपने उत्पादों को करेंगी प्रदर्शित, कई देशों से आएंगे खरीदार
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
नॉलेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो मॉर्ट एंड सेंटर में 16 जुलाई से 18 जुलाई तक 11वां इंडियन फैशन ज्वेलरी और एसेसरीज शो आयोजन किया जाएगा। मेले में पारंपरिक भारतीय कारीगरी के साथ बने नए फैशन ज्वेलरी एवं हथकरघा पर बने कपड़े प्रदर्शित किए जाएंगे। शुक्रवार को एक्सपो मॉर्ट में प्रदर्शनी के अध्यक्ष सुरिंदर सिंह साहनी ने यह जानकारी दी। प्रदर्शनी में देशभर से लगभग 250 कंपनियां विभिन्न प्रकार के फैशन ज्वेलरी एवं एसेसरीज उत्पादों को प्रदर्शित करेंगी। जिसे खरीदने के लिए कई देशों के खरीदार पहुंचेंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दशकों में देश ने इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता विकसित की है और अब भारत आधुनिक फैशन कपड़ों से मेल खाते एसेसरीज के बड़े सप्लायर के रूप में उभरा है। वहीं एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष फैशन ज्वेलरी प्रदर्शनी ग्रेटर नोएडा में होती थी और एसेसरीज (हथकरघा पर बने कपड़े) की प्रदर्शनी दिल्ली में होती थी। इस वर्ष दोनों का एकसाथ आयोजन एक्सपो मॉर्ट में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से फैशन ज्वलेरी का कारोबार करीब 30 से 35 फीसदी ज्यादा रहने की संभावना है, जबकि गारमेंट्स की खरीदारी भी 15 से 20 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।
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अमेरिका और यूरोप है सबसे बड़े खरीददार
मेेले में अमेरिका और यूरोपीय देशों के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, मिस्र, घाना, जापान, और वियतनाम के खरीदार आएंगे। इनमें से अमेरिका और यूरोपीय देश हस्तशिल्प उत्पादों के सबसे बड़े खरीदार हैं।
उत्तराखंड की फैशन ज्वेलरी को बनाया थीम
उत्तराखंड की फैशन ज्वेलरी को प्रदर्शनी का थीम बनाया गया है। यहां से 25 प्रदर्शक, इसके अलावा पूर्वोत्तर, पूर्वी, उत्तरी, पश्चिमी क्षेत्र से 15-15 प्रदर्शक आएं हैं। प्रत्येक दिन फैशन शो भी आयोजित किया जाएगा।
हस्तशिल्प निर्यात कारोबार में हुई वृद्धि
निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि वर्ष 2017-18 में हस्तशिल्प निर्यात कारोबार जहां करीब साढ़े तीन फीसदी तक कम हो गया था। इसमें जीएसटी और नोटबंदी भी बड़ा कारण थे। इस बार इसमें गुणात्मक सुधार देखा गया है। इस बार निर्यात में करीब पांच फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
कम राशि में भी मिल सकेंगे डिजाइनर
निदेशक ने बताया कि प्रदर्शकों को यूरोपीय और अमेरिकी देशों में निर्यात के लिए वहां की पसंद से मेल खाते और उन जगहों की जानकारी रखने वाले डिजाइनरों को रखना पड़ता था। इसके लिए कम से कम साढ़े 16 लाख से अधिक की राशि देनी पड़ती थी। अब ईपीसीएच ने इस नियम को हटाकर कम राशि में डिजाइनर भी रखने की छूट दे रखी है। ऐसे में प्रदर्शकों से काफी बोझ कम हो सकेगा।