‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरा लागू करो, शंका हो तो कोर्ट जाओ’
- केजरीवाल ने फिर लिखा उपराज्यपाल को पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केजरीवाल ने फिर उपराज्यपाल को पत्र लिखा है, जिसमें दो-टूक शब्दों में कहा है कि उपराज्यपाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरी तरह लागू करें। कोई शंका है तो वह सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।
कोर्ट के फैसले के बाद भी सेवाओं के मसले पर चल रही मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल की रार के बीच केजरीवाल ने लिखा है कि गृह मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या करने का हक नहीं है। उपराज्यपाल को कोई शंका है तो सफाई लेने ले लिए तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाएं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं करें। साथ ही यह भी लिखा है कि उपराज्यपाल कोर्ट के आदेश का एक हिस्सा तो मान रहे हैं, जिसमें कहा गया है सरकार को अनुमति लेनी जरूरी नहीं है। लेकिन उसी आदेश का दूसरा हिस्सा नहीं मान रहे हैं, जिसमें लिखा है कि केंद्र सरकार के अधिकार केवल तीन विषयों तक सीमित हैं।
केजरीवाल ने पत्र में पांच मसले उठाए हैं। इसमें सलाह, मंत्री परिषद का फैसला, कौन है दिल्ली सरकार, एलजी के पास फाइल जाना जैसे चार मसलों पर उपराज्यपाल व केंद्र सरकार राजी है। लेकिन आरक्षित विषय पर वह सहमत नहीं हैं। केजरीवाल के मुताबिक असल में उपराज्यपाल और गृह मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली सर्विसेज विभाग अब भी आरक्षित विषय है। लेकिन अदालत ने सिर्फ भूमि, पुलिस और कानून-व्यवस्था को ही आरक्षित बताया है। मतलब सर्विसेज स्पष्ट रूप से दिल्ली की चुनी हुई सरकार का विषय है जिसको उपराज्यपाल व केंद्र सरकार उनको देने को तैयार नहीं हैं।
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उपराज्यपाल का जवाब, फैसले की गलत व्याख्या कर रहे मुख्यमंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उपराज्यपाल केजरीवाल को जवाबी पत्र लिखा है। उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की व्याख्या आप गलत तरीके से कर रहे हैं। सेवा का मामला नियमित पीठ में लंबित होने से अभी उस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। उपराज्यपाल ने इस बात पर भी हैरानी जताई है कि बिना उनके दफ्तर तक पहुंचे मुख्यमंत्री का पत्र मीडिया में सार्वजनिक कर दिया गया।
उपराज्यपाल ने अपने पिछले पत्र का संदर्भ देते हुए लिखा है कि उस पत्र में चुनिंदा तथ्यों पर ही मुख्यमंत्री बात कर रहे हैं। उसमें कहा गया था कि वह फैसले के प्रभाव का अभी तक अध्ययन कर रहे हैं। वहीं, उसमें मामले के नियमित बेंच में जाने का जिक्र था। इसके अलावा पिछले पत्र में उन्होंने संविधान के अनुछेद 145 के उपखंड (3) की तरफ ध्यान दिलाया था लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कानूनी प्रावधानों की चर्चा नहीं की है। उपराज्यपाल ने हैरानी जताई है कि मुख्यमंत्री का पत्र पहले उन्हें मिलना चाहिए लेकिन वह राजनिवास पहुंचने से पहले ही सोशल व इलेक्ट्रानिक मीडिया पर जारी कर दिया गया है।