नोएडा। रूस और यूक्रेन के बीच लगातार बढ़ते विवाद का असर जनपद के करीब 15 हजार इंजीनियरिंग उद्योगों पर पड़ने लगा है। कच्चा माल महंगा होने से इन उद्योगों पर महंगाई की जबरदस्त मार पड़ी है। वहीं आपूर्ति रुकने से उत्पादन पर बुरा असर पड़ने लगा है। धातुओं की कीमत में 10 फीसदी तक की तेजी ने छोटे-बड़े उद्योगों को अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने का काम शुरू कर दिया है। वहीं, यूरोपीय देशों पर युद्ध की वजह से मंडरा रहे संकट के बादल ने इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात करने वाले जनपद के तीन से चार हजार उद्योगों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी एवं इंजीनियरिंग उद्योग से जुड़े उद्यमी प्रेम सिंह चौहान ने बताया कि युद्ध की वजह से स्टील, आयरन, जिंक, पीतल, कॉपर, आदि की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) बुरी तरह प्रभावित होने लगी है। औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन में 30 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन, रूस और अन्य यूरोपीय देशों से केमिकल, मिनरल और इनोर्गेनिक केमिकल का आयात होता है। एलोय स्टील बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है। इसकी कीमत चार से पांच हजार रुपये प्रति टन बढ़ने से हर महीने लाखों रुपये का बोझ बढ़ गया है। जिले के उद्योग से अफ्रीकी, यूरोपीय, यूएई और गल्फ देशों में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात किया जाता है।
घरेलू बाजार पर भी असर
युद्ध का असर लोहा मंडी पर भी दिखाई दे रहा है। लोहा सरिया के दाम में पांच से दस रुपये, लोहा चादर में सात से आठ रुपये, लोहा पाइप में पांच से छह रुपये, जिंक में 15 से 20 रुपये और कॉपर के दाम में 70 से 80 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। उद्योगों के साथ भवन निर्माण करना भी इसकी वजह से महंगा हो रहा है।
जनपद में इंजीनियरिंग उद्योग
बेसिक मेटल उद्योग 602
मेटल उद्योग 619
मशीनरी एंड पार्ट्स 776
इलेक्ट्रिक मशीनरी 892
ट्रांसपोर्ट पार्ट्स 362
मैन्युफैक्चरिंग उद्योग 11718