नूंह। जिले के कई बड़े गांवों से लगातार हो रही मौतों के मामलों में कमी नहीं आ रही है। इंडरी, घासेड़ा के साथ नूंह, तावडू व फिरोजपुर झिरका में अभी तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं तावडू उपमंडल के गांव सहसोला में बीते करीब एक माह में 15 लोगों की जाने गई है। इन मौतों का कारण भले ही कुछ भी हो लेकिन जिस तरह से यह सिलसिला जारी है, उससे लोगों में डर का माहौल है। 15 में से सिर्फ एक व्यक्ति का शव कोरोना प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया था।
ग्रामीण आजाद खान व एडवोकेट साहून ने बताया कि पिछले एक महीने से अब तक यहां पर कम से कम 15 लोगों के शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया जा चुका है इनमें से एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हुई, उसका शव कोरोना प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। गांव के इन सभी 15 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो चुके हैं। जांच नहीं हो पाने के कारण अन्य लोगों की मौत के कारणों का पता भी नहीं चल पाया है। हालांकि अधिक लोगों में खांसी, जुकाम, बुखार आदि के लक्षण सामने आए थे।
जिले में नूंह के बाद तावडू ब्लॉक में सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं तावडू में कोरोना की रोकथाम के लिए सीएचसी भवन में कोविड केयर सेंटर भी बनाया गया है। फिलहाल यहां कोरोना के मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो रहा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों से लोग इलाज करवा रहे हैं। कोरोना के डर की वजह से सरकारी अस्पतालों से दूरी बनाए हुए हैं। लोगों में सरकारी अस्पतालों के प्रति डर का माहौल है। इसके चलते मौतों का सही कारण पता नहीं चल पा रहा है।
जानकारी के अभाव में हो रही परेशानी
लोगों में कोरोना का डर बना हुआ है। लोगों का मानना है कि अस्पताल जाने पर जांच के बाद कोरोना ही बताया जाएगा। इसी सोच की वजह से लोग अस्पतालों से दूरी बनाए हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में इससे पहले एक साथ लगातार कभी इतनी मौतें नहीं हुईं। अगर जांच कराई जाए तो सही वजह सामने आ सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में डोर-टू-डोर जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस गांव के बारे में जानकारी ली जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राथमिकता के साथ लोगों की जांच की जा रही है इसमें लोग सहयोग करें।
डॉ सुरेंद्र यादव सीएमओ, नूंह