लॉजिक्स के 14 टावरों का काम पूरा होना बाकी, केवल 205 की हुई रजिस्ट्री
फारेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट जारी होने के बाद फिर चर्चा में आया लॉजिक्स
प्राधिकरण की ओर से घोषित किया गया है डिफॉल्टर , 646 करोड़ है बकाया
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-143 के लॉजिक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के 14 टावरों का काम पूरा होना अब भी बाकी है, वहीं केवल 205 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री हुई है। यही नहीं प्राधिकरण का 646 करोड़ रुपये बिल्डर पर बकाया है और प्राधिकरण ने बिल्डर को डिफॉल्टर घोषित कर रखा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की ओर से कराए गए फॉरेंसिक ऑडिट के बाद बिल्डर ग्रुप फिर से चर्चा में है।
लॉजिक्स इंफ्राटेक को प्राधिकरण ने जून 2010 में 100112.19 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया। यहां 22 टावरों में 2401 फ्लैट बनाने की मंजूरी मिली, लेकिन बिल्डर ने अब तक केवल आठ टावरों का निर्माण किया है और बाकी के 14 टावरों का काम पूरा होना बाकी है। हालांकि आठ टावरों में 944 फ्लैटों को ओसी मिली, जिसमें से अधिकांश फ्लैटों पर कब्जा दिया गया, लेकिन रजिस्ट्री सभी की नहीं हो पाई। यही नहीं, 2300 से ज्यादा फ्लैटों की बुकिंग भी पहले से कर ली गई, लेकिन अब तक अधिकांश को फ्लैट नहीं मिले। ऐसे में बिल्डर पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण की ओर से भी बार-बार बिल्डर पर रजिस्ट्री का दबाव बनाया जाता रहा, लेकिन जवाब नहीं मिला। इसे बनाने के लिए एक तय समयावधि दी गई। लॉजिक्स ने 13 साल बाद भी काम पूरा नहीं किया और दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो गई।
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फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट को गलत बताया
हाल ही में बिल्डर परियोजना की फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट में 46 प्रतिशत कम कीमत पर 261 फ्लैट बेचने का मामला प्रकाश में आया। इसमें तथाकथित तौर पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी का नाम सामने आया। मामला खुलने के बाद बिल्डर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट को गलत बताया। बिल्डर का कहना है कि उस समय आवंटन की दर 2700 रुपये प्रति वर्ग फीट थी। ज्यादा फ्लैट लेने वालों को 13 प्रतिशत की छूट भी थी, ऐसे में 46 प्रतिशत का लाभ देने की बात साबित नहीं होती है।