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Noida News: सरकारी अस्पताल के कमरों से फर्नीचर भी गायब

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जिला अस्पताल के कमरों से फर्नीचर भी गायब
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अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नई सीएमएस ने जांच की शुरू

ओपीडी में रखी मिली पुराने अस्पताल की मेज-कुर्सी, नई का अता-पता नहीं


माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। जिला अस्पताल के शौचालयों से टोटियां और शावर ही नहीं बल्कि ओपीडी से फर्नीचर भी गायब हो गया है। 546 करोड़ की लागत से बने आलीशान अस्पताल में नया फर्नीचर लगवाया गया था। नई मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रेनू अग्रवाल ने अस्पताल का निरीक्षण किया तो ओपीडी के कमरों में पुराने अस्पताल की मेज-कुर्सी रखी मिलीं। सीएमएस ने अस्पताल के कर्मचारियों से तलब किया है।

अमर उजाला ने 13 मई को ‘मरीजों से पहले चोरों का डेरा, शौचालयों की टोटियां भी नहीं छोड़ी’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने पदभार संभालते ही मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अस्पताल के भूतल पर बने ओपीडी के कमरों में अस्पताल के निर्माण के समय ही महंगी कुर्सी और मेजें भी रखवाई गई थीं, जिनका अब अता-पता नहीं है। इनकी जगह सेक्टर-30 स्थित पुराने अस्पताल का फर्नीचर पाया गया। इस मामले में कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है। साथ ही, नए अस्पताल में उपलब्ध कराए गए वेंटिलेटर, बेड और अन्य उपकरणों की जानकारी भी तलब की गई है।
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इसलिए सामने आया मामला

सेक्टर-39 स्थित अस्पताल के निर्माण के दौरान डॉ. रेनू अग्रवाल ही जिला अस्पताल की सीएमएस थीं। अस्पताल के निर्माण से लेकर उसमें उपलब्ध कराई गई तमाम सुविधाओं के बारे में जानकारी थी। अगस्त 2020 में उन्हीं के समय मुख्यमंत्री ने इस इमारत को कोविड अस्पताल के रूप में शुरू किया था। 2021 में उनका तबादला हो गया था। अब दोबारा तैनाती होने पर तमाम गड़बडिय़ां आसानी से पकड़ रही हैं।




घर में लटका मिला सीएमएस कक्ष का टीवी

सीएमएस के भूतल स्थित कक्ष में दो साल पहले एलईडी टीवी लगवाया गया था। इस टीवी को भी हटा दिया गया था। नई सीएमएस ने जब जवाब मांगा तो कर्मचारी टीवी की तलाश में जुट गए। यह टीवी आवासीय टावर के एक फ्लैट में लटका पाया गया।
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अस्पताल में मची हलचल

नई सीएमएस के आते ही अस्पताल में हलचल मच गई है। मरीजों को इंतजार कराने वाले स्टाफ को समय पर आने की सख्त हिदायत दी गई है। वहीं, इन दिनों अधिकांश कर्मचारी तलाशी अभियान में जुटे हैं। अस्पताल को आवंटित एक-एक सामान की लिस्ट बनाकर उसे तलाशा जा रहा है। ओपीडी से लेकर वार्ड और स्टोर तक खंगाले जा रहे हैं।
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