ओडीएफ घोषित कर दो, शौचालय बनवाते रहना
जिला प्रशासन इन दिनों आंख बंद कर गांवों को खुले में शौच मुक्त कर रहा है। आरोप है कि इसके लिए प्रशासन सरपंचों पर गांव को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त होने का ग्राम पंचायत से प्रस्ताव के लिए दबाव भी बना रहा है। ऐसे में धरातल पर सच्चाई प्रशासन के दावों से अलग है। कई सरपंचों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि प्रशासन के अधिकारी उन पर दबाव बनाते हैं कि गांव को ओडीएफ होने का प्रस्ताव बनाकर दे दो, शौचालय बाद में बनवाते रहना। यदि कोई सरपंच आनाकानी करता है, तो उसे निलंबित करने की धमकी दी जाती है। अमर उजाला ने बुधवार को नूंह के मरोड़ा गांव की स्थिति जानी।
इस गांव को सुलभ इंटरनेशनल संस्था ने विकास कराने के लिए अपनी सूची में शामिल किया है और इसका नाम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रख दिया था। लेकिन प्रशासन ने अगले ही दिन आदेश जारी कर दिए कि या तो ट्रंप के नाम के बोर्ड उखड़वा दो या प्रशासन खुद उसे उखड़वा देगा। इसके बाद सुलभ इंटरनेशनल ने बिना किसी विवाद में पड़े चुपचाप बोर्ड उखाड़ दिए। इस गांव को प्रशासन चार माह पहले ही ओडीएफ (गांव को खुले में शौच मुक्त बनाना) घोषित कर चुका है।
हमने यहां स्थिति का जायजा लिया तो कई चौंकाने वाले तथ्य निकलकर सामने आए। यह प्रशासन द्वारा ओडीएफ को लेकर मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री व अफसरों के सामने किए गए बड़े-बड़े दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। बता दें कि इन दिनों प्रशासन पर जिले को ओडीएफ कराने का भारी दबाव है। लिहाजा, प्रशासन उस दबाव को सरपंचों पर धकेलते हुए ऐसे-ऐसे गांवों को ओडीएफ घोषित कर रहा है, जो मापदंड पर खरे नहीं उतरते।
बिना गड्ढा खोदे बना दिया शौचालय
प्रशासन ने मापदंड तय किया है कि जिस गांव के सभी घरों में शौचालय होंगे और गांव के लोग उन्हें प्रयोग करते हो तथा कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न जाता हो, उस गांव को ओडीएफ का दर्जा दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने करीब चार माह पहले ग्राम पंचायत मरोड़ा जिसमें गांव मरोड़ा, छावा व निजामपुर आता है, को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया था। इसके लिए प्रशासन ने सरपंच से प्रस्ताव भी लिया था। लेकिन हकीकत यह है कि ग्राम पंचायत मरोड़ा में शत-प्रतिशत तो दूर 50 फीसदी घरों में भी शौचालय नहीं है। गांव पूर्व सरपंच जमील के बेटे जब्बार, मुकेश आदि ने बताया कि उनके गांव में 20 फीसदी घरों में भी शौचालय नहीं हैं। जब गांव को ओडीएफ बनाया गया था तो उस समय प्रशासन ने कपड़े टंगवाकर, कच्चे में सीट जमवाकर बिना गड्ढा खोदे शौचालय बनवा दिए थे। अब वे टाट-पट्टी व कपड़े टांग कर बनाए गए शौचालय समाप्त हो चुके हैं और गांव के गिने-चुने घरों में ही शौचालय हैं।
खुद काम नहीं करते, दूसरों को करने नहीं देते
ग्रामीणों ने कहा कि जब गांव में सुलभ इंटरनेशनल ने बिना किसी से पैसा लिए शौचालय बनाने का काम शुरू किया है तो प्रशासन उस पर ऐतराज जता रहा है। जबकि पूरा मामला प्रशासन के संज्ञान में पहले से ही था। प्रशासन ने अमेरिका के राष्ट्रपति के नाम का बोर्ड टांगने के बाद ही ऐतराज जताया है। इससे उनके गांव का विकास प्रभावित होगा। 23 जून को सुलभ इंटरनेशनल मरोड़ा को ट्रंप सुलभ गांव का नाम दिया था। जिसके तहत ग्राम पंचायत के तहत आने वाले गांव मरोड़ा, छावा व निजामपुर गांवों में शौचालय, स्कूल की बिल्डिंग, सिलाई सेंटर, रोड व पेयजल सुविधा आदि पर काम किया जाना था। इसका शिलान्यास कर काम शुरू भी कर दिया गया। गांव के सरपंच ने बताया कि सुलभ संस्था के आग्रह पर ग्राम पंचायत ने एक प्रस्ताव पास कर उन्हें गांव में विकास कार्यों को मंजूरी दी गई थी। लेकिन दो दिन बाद उन्हें डीसी गांव से ट्रंप का नाम हटाने का आदेश आ गया। अजीज का कहना है कि जिला प्रशासन ने गांव की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गांव के जब्बार का कहना है कि गांव का विकास करना जिला प्रशासन का काम है। लेकिन जिला प्रशासन खुद तो यह काम कर नहीं रहा। कोई एनजीओ यह काम करना चाहे तो उसमें भी प्रशासन द्वारा अडंगा लगाया जाता है।
जारी रहेंगे विकास कार्य
सुलभ संस्था की वाइस प्रेसिडेंट मोनिका जैन का कहना है कि उन्होंने गांव में जिन विकास कार्यों की घोषणा की है, वे जारी रहेंगे। उन्हें जिला प्रशासन की ओर से ट्रंप का नाम हटाने का आदेश मिला था। वह उन्होंने हटा दिया है। उनका उद्देश्य प्रशासन से टकराव करना नहीं है। ट्रंप का नाम केवल लोगों को आकर्षित करने के लिए था। वहीं, इस पर जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। उपायुक्त मनीराम शर्मा फोन रिसीव नहीं कर पाए, वहीं अतिरिक्त उपायुक्त नरेश नरवाल ने खुद को व्यस्त बताकर फोन काट दिया।