सवारियों को बीच रास्ते में उतारकर प्रशासन जुटा रहा लग्जरी गाड़ियां
गुरुग्राम। कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) के उद्घाटन को लेकर 19 नवंबर को गांव सुल्तानपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम है। कार्यक्रम में आने-जाने व व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने रिक्विजेशन एंड एक्विजेशन ऑफ मूवेबल प्रॉपर्टी एक्ट (चल संपत्ति की मांग एवं अधिग्रहण अधिनियम) 1975 के तहत गाड़ियों के इंतजाम करने के आदेश पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), अतिरिक्त उपायुक्त कम आरटीए सचिव व गाड़ी मालिकों को आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों की आड़ में पुलिस व आरटीए लग्जरी गाड़ियों को जब्त करने का हवाला देते हुए छीनने में लगे हुए हैं। बीच रास्ते में सवारियों को उतारकर गाड़ियों को प्रधानमंत्री की रैली के लिए जब्त किया जा रहा है, जिसका चालक व गाड़ी मालिक विरोध कर रहे हैं। विरोध करने पर उन्हें पुलिस लाइन में बुलवाकर बैठाया जा रहा है। 15 नवंबर से शनिवार दोपहर तक पुलिस व आरटीए ने करीब 150 वाहनों को जब्त कर प्रधानमंत्री रैली के लिए लगाया है।
रैली के बाद गाड़ी ले जाने को कह रहे
गाड़ी मालिक सुनील कुमार ने बताया कि उनकी इनोवा गाड़ी बुकिंग पर थी। 15 नवंबर को इफ्को चौक पर चालक जब गाड़ी लेकर पहुंचा तो उसे ट्रैफिक पुलिस व आरटीए कार्यालय के कर्मियों ने रुकवा लिया। सवारियों को नीचे उतरवा दिया गया। बिना वजह बताए चालक को गाड़ी जब्त करने की बात कहकर गाड़ी को थाने ले चलने को कहा। पुलिसकर्मी गाड़ी को पुलिस लाइन ले गए जहां उसके हाथ में जिला मजिस्ट्रेट के आदेश देते हुए 19 नवंबर को प्रधानमंत्री की रैली के बाद गाड़ी वापस ले जाने को कहा। एक ट्रांसपोर्टर ने बताया कि पुलिस व आरटीए लग्जरी कमर्शियल गाड़ियों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने लग्जरी गाड़ियों को रैली के लिए मर्जी के खिलाफ जब्त कर लिया है।
अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
पुलिस उपायुक्त मुख्यालय कुलविंदर सिंह ने इस बारे में जानकारी होने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में जिला मजिस्ट्रेट से ही पूछा जाए तो बेहतर होगा। उधर, 16 नवंबर को तबादला हो चुके तत्कालीन आरटीए सचिव मुनीश कुमार ने कहा कि उनका तबादला हो गया है।
ये है नियम
एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने बताया कि चल संपत्ति की मांग एवं अधिग्रहण अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति की चल-अचल संपत्ति को अधिग्रहीत करने का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होता है। अधिग्रहीत करते वक्त इसकी सूचना संपत्ति मालिक को दी जाती है। नियमानुसार इसकी कीमत का भी भुगतान किया जाता है। संपत्ति अधिग्रहण में यदि संपत्ति मालिक को आपत्ति होती है तो जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है, जिस पर सुनवाई के बाद ही संपत्ति का अधिग्रहण होगा।