प्लास्टिक की प्रचार सामग्री का नहीं कर सकते प्रयोग
जिला प्रशासन ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को जारी किए दिशानिर्देश
विमान से गिरा सकते है प्रचार सामग्री, चुनाव खर्च में जुड़ेगी धनराशि, देना पड़ेगा ब्योरा
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। चुनाव प्रचार के दौरान राजनीति दलों और उम्मीदवारों को पर्यावरण संरक्षण का ख्याल रखना होगा। प्रचार सामग्री में प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेंगे। मंगलवार को इस संबंध में जिला प्रशासन ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। वहीं, प्रत्याशी प्रचार सामग्री विमान या हेलिकॉप्टर से गिरा सकता है, लेकिन वह चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा। साथ ही उसका ब्योरा भी देना पड़ेगा। अपर जिला निर्वाचन अधिकारी और एमसीसी के नोडल अधिकारी बलराम सिंह ने बताया कि चुनाव प्रचार को लेकर राजनीति दल और उम्मीदवारों ने काफी सवाल किए। उनका जवाब दिया गया है। प्रत्याशियों को पर्यावरण संरक्षण के हित में प्लास्टिक के प्रयोग से बचना होगा। कोई भी प्रत्याशी अगर किसी की निजी संपत्ति पर पोस्टर या बैनर लगाता है तो उसे पहले स्वामी से लिखित अनुमति लेनी होगी। उम्मीदवार विशेष उप साधन जैसे टोपी, मास्क या स्कार्फ पहन सकते हैं, लेकिन वह खर्च में बताना होगा। पोशाक, साड़ी शर्ट आदि की आपूर्ति या वितरण नहीं कर सकते। अगर ऐसा करने पर मतदाताओं को रिश्वत देने के बराबर समझा जाएगा। मतदाताओं को शिक्षित करने के लिए उम्मीदवार नकली ईवीएम बैलेट यूनिट तैयार करा सकता है, लेकिन वह लकड़ी, प्लास्टिक या प्लाई बोर्ड के बॉक्स से निर्मित होनी चाहिए। उसका रंग सफेद, पीला या धूसर (ग्रे) रख सकते हैं।
देवताओं की मूर्ति बांटी तो मानी जाएगी रिश्वत
भारतीय दंड संहिता की धारा-171 (ड) के तहत अगर उम्मीदवार अपनी मूर्ति या देवी देवता की मूर्तियों के चित्रण युक्त डायरी, कलेंडर या स्टीकर का मुद्रण या वितरण करता है तो वह रिश्वत मानी जाएगी। राजनीति दल या उम्मीदवार अपना कार्यालय निजी या सार्वजनिक संपत्ति, धार्मिक स्थल, मतदान केंद्र से 200 मीटर के अंदर, शैक्षिक संस्था या चिकित्सालय के निकट अतिक्रमण करके नहीं खोल सकते हैं।