कामकाजी महिलाओं के हॉस्टल का इंतजार और बढ़ा
नूंह। लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है, तमाम पार्टियां अब चुनावी मोड में आ चुकी हैं। लोगों के हितों के लिए लाई गई कई योजनाएं जो अबतक अधर में हैं उनपर अब नई सरकार बनने के बाद मई में ही अमल किया जाएगा। अब इसे प्रशासन की अनदेखी कहें या प्रदेश सरकार की सुस्ती, कारण जो भी हो आचार संहिता लगने के कारण अब कामकाजी महिलाओं को नूंह में हॉस्टल के लिए और इंतजार करना पड़ेगा। पिछले एक महीने से तैयार इस हॉस्टल का प्रशासन व भाजपा सरकार उद्घाटन नहीं कर पाई। महिलाओं ने इस मामले में प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया है। नूंह के शाहपुर नगली रोड पर हॉस्टल लगभग सवा दो करोड़ की लागत से बनकर तैयार हो चुका है। यहां कामकाजी महिलाओं को सस्ती दर पर रहना-खाना व सुरक्षा मिलेगी।
नूंह को जिला बने 13 वर्ष हो गए हैं। लेकिन यहां कामकाजी महिलाओं के रहने के लिए कोई ऐसा सुरक्षित व एकल स्थान नहीं था। जो महिलाएं यहां नौकरी कर रही हैं या फिर कामकाजी महिला के दायरे में आती हैं, वो कोई व्यवस्था न होने के कारण मजबूरन किराये पर कमरा लेकर रहती हैं। इसमें सबसे अधिक दिक्कत अध्यापक महिलाओं को आ रही है, जो दूसरे जिलों की हैं और रोजाना आना-जाना न करने के कारण उन्हें किसी के घर में किराये पर रहना पड़ रहा है। यह समस्या पिछले कई सालों से चली आ रही है। इसको ध्यान में रखते हुए साढ़े चार साल पहले इस हॉस्टल की नींव रखी गई थी। लेकिन काम काफी धीमा होने के कारण यह दो-तीन दिन पहले बनकर तैयार हो गया है।
सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों से रहेगा लैस
हॉस्टल में 37 महिलाओं के रहने की व्यवस्था है। इसके अलावा यहां मेस, छोटे बच्चों को रखने के लिए अलग से जगह बनाया गया है ताकि महिलाएं कामकाज पर जाएं तो उनके बच्चों को यहां रखा जा सके। कॉमन व वार्डन रूम के अलावा डायनिंग हॉल व किचन की व्यवस्था है। यहां महिलाओं के किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। इसके लिए यहां सीसीटीवी कैमरे के अलावा गार्ड की व्यवस्था होगी। आबादी के बीच बने इस हॉस्टल में दीवारें भी काफी ऊंची की गई हैं। यहां महिलाओं से रहने, खाने के लिए बहुत कम राशि ली जाएगी। यह नो प्रॉफिट नो लॉस पर चलेगा। फिलहाल इसे रेडक्रास, एमडीएम या फिर अन्य कोई एजेंसी चलाएगी यह जल्द ही निर्णय होगा।