सिस्टम की लापरवाही के कारण 4 कमरों में शिक्षा लेने को मजबूर 671 बेटियां
अपग्रेड स्कूल में 4 साल बाद भी जमीन पर बैठ रहीं छात्राएं
- बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा स्कूल
राजुद्दीन जंग
नगीना। एक तरफ जहां सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाकर महिला सशक्तिकरण का संदेश दे रही है वहीं दूसरी ओर ब्लॉक के एकमात्र बालिका स्कूल की सैकड़ों छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। दर्जनों गांवों की बेटियों को पढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार कितनी गंभीर है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 4 साल बीतने के बावजूद 671 छात्राओं को स्कूल की छत भी नसीब नहीं हुई है। नगीना ब्लॉक के राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को सितंबर 2014 में अपग्रेड किया गया था। लेकिन उसके बाद से ही शिक्षा विभाग के उदासीन रवैये के कारण लैब के लिए आए 25 लाख रुपये ज्यों के त्यों बैंक खाते में पड़े हैं। दूसरी तरफ पंचायती विभाग हरियाणा ने ग्राम पंचायत की जमीन के लेनदेन की प्रक्रिया बदल दी। जिसके कारण नगीना ग्राम पंचायत द्वारा पिछले साल दिया गया ग्रामसभा का प्रस्ताव रद्द हो गया। ऐसी हालत में प्राथमिक पाठशाला नगीना में छठी से बारहवीं तक पढ़ने वाली बेटियों की कक्षाएं दरी बिछाकर फर्श पर लगाई जा रही हैं। उनके लिए चार कमरे दिए गए हैं जिनमें सैकड़ों छात्राओं को बैठाने में काफी परेशानी होती है। चार कमरों के अंदर और बाहर बरामदे में शिक्षा लेनी पड़ती है। परिसर में पर्याप्त शौचालय और पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यहां दो दर्जन गांवों की लड़कियां उच्च शिक्षा हासिल करने आती हैं।
कस्बे के सरपंच नसीम अहमद बताते हैं कि नवंबर 2017 में नगीना से करेहड़ा रोड पर पड़ने वाली पंचायत की 2 एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया था। अब पता चला है हरियाणा पंचायत विभाग ने पंचायतों द्वारा विभागों को दी जाने वाली जमीन को 33 साल के पट्टे पर एक रुपए पर 30 साल के हिसाब से देने का निर्णय लिया है। इसलिए दोबारा से शिक्षा विभाग के नाम मुझे प्रस्ताव देना पड़ेगा।
चिंतित रहते हैं अभिभावक
गांव घागस के आस मोहम्मद व हारुन खान ने बताया कि करीब 4 साल से बैठने की सही व्यवस्था नहीं हो सकी है। नया भवन अभी बना नहीं है। कई साल से कहते आ रहे हैं न जाने कब बनेगा। सरकार बेटियों की शिक्षा को लेकर तमाम संदेश देती है लेकिन उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रही है। करीब 15 दिन से गांव में आने वाली बस भी बंद हो चुकी है। हमारी बेटियां दिक्कत महसूस करती हैं।
पच्चीस लाख रुपये लैब बनाने के लिए आया हुआ है। अपना भवन ही नहीं है कहां बनाएं। दोबारा पंचायत से प्रस्ताव मांगे 6 महीने हो गए। अभी तक तो दिया नहीं है, चार कमरे मिले हैं। उनमें भी दरी बिछाकर छात्राएं अध्ययन का काम करती हैं। पूरी सहूलियत नहीं है, स्टाफ व अभिभावक परेशान हैं। अधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई हुई नहीं। - मोहम्मद अरशद खान, प्राचार्य, राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
इस बारे में संबंधित अधिकारियों से पूछा जाएगा। आखिर क्यों देर हो रही और इसके लिए जिम्मेवार लोग जो भी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - रामविलास शर्मा, शिक्षा मंत्री
फोटो- प्राथमिक स्कूल नगीना में लगती 12वीं स्कूल की कक्षाएं।