दादरी के रसूलपुर समेत कई गांव में कैंसर से हो चुकी है कई लोगों की मौत, लीवर कैंसर के मरीज ज्यादा
अभियान-4
12 लोगों की मौत हो चुकी है ऊंचा अमीरपुर गांव में
24 गांवों में कैंसर के केस ज्यादा आ रहे हैं
09 लोगों की जान चुकी है एक साल में रसूलपुर गांव में
इंट्रो
रसूलपुर...किसी की जुबां पर यह नाम आता है तो लोग कहते हैं-अच्छा, वो कैंसर वाला गांव। दरअसल, ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव के अधिकतर परिवारों में कैंसर मरीज हैं। इसके आसपास के 24 गांव भी लाइलाज बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। दादरी के रसूलपुर गांव की आबोहवा इस कदर खराब हो चुकी है कि शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां कैंसर की वजह से किसी की मौत या इसका मरीज न हो। रोजी-रोटी की व्यवस्था के साथ कीमोथैरेपी और कैंसर की दवाओं का इंतजाम करना ग्रामीणों के जीवन का हिस्सा बन गया है।
इस गांव में एक साल के अंदर कैंसर से करीब नौ लोगों की मौत हो चुकी है। चार दिन पहले प्रेमपाल सिसोदिया की मौत भी कैंसर से हुई थी। उनके परिजन बताते हैं कि कैंसर का पता चौथी स्टेज में चला। गाजियाबाद और दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में दिखाया लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि अब कुछ नहीं किया जा सकता है। इनकी घर पर ही सेवा कीजिए।
गांव पूर्व प्रधान सेवानंद, जयंती शर्मा, राजेंद्र सिंह, ओमवती, उपदेश कुमार, शिवकुमार, जयवीर शर्मा, रामभरोसे और विजेंद्र सिंह समेत कई लोग कैंसर से जंग हार चुके हैं। इनके घरों में दीवारों पर टंगीं तस्वीरें और मुरझाए परिवार के सदस्यों के चेहरे इस दंश की गवाही देती हैं। परिजन बताते हैं कि अधिकतर मामलों में शुरू में पता ही नहीं चला कि कैंसर है। लीवर से जुड़ा कैंसर अधिकतर लोगों को हुआ। डॉक्टरों का कहना था कि पानी में किसी विषाक्तता की वजह से ऐसा हो सकता है।
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24 गांवों तक फैला है संक्रमण
यूं तो पूरे देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन दादरी के करीब 24 गांवों में इसके केस ज्यादा आ रहे हैं। रसूलपुर के करीब 10 किमी के दायरे में ये गांव हैं। चार-पांच साल में कैंसर के केस ज्यादा बढ़े हैं। कई परिवार इलाज में कर्जदार हो गए। इन गांवों ऊंचा अमीरपुर, पटाडी, ततारपुर, दादुपुर आदि शामिल हैं।
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इलाज अति दूर और महंगा
दादरी एनटीपीसी में अस्पताल है लेकिन इसमें कैंसर के इलाज तो दूर, जांच की भी व्यवस्था नहीं है। लिहाजा लोगों को दिल्ली, नोएडा या गाजियाबाद के निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
प्रदूषित पानी मुख्य वजह
-रसूलपुर की प्रधान आशा देवी ने बताया कि एनटीपीसी के नजदीक के कई गांवों में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं।
-एनटीपीसी में नाले का पानी इस्तेमाल होने के बाद निकलता है जिससे आसपास के इलाके का पानी प्रदूषित हो रहा है।
-प्लांट से निकलने वाली कोयले की राख, प्रदूषण और प्रदूषित पानी पीने से लोग कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
-किसान आंदोलन के दौरान जिलाधिकारी समेत एनटीपीसी के अधिकारियों के सामने भी मुद्दा उठा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-ऊंचा अमीरपुर गांव के प्रधान प्रदीप कुमार सिसोदिया ने कहा कि कैंसर से करीब 12 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग इस बीमारी जूझ रहे हैं।
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कैंसर ने छीना पति, अब खुद चुका रहीं कर्ज
रसूलपुर निवासी शीला देवी ने बताया कि उनके पति रामभरोसे सब्जी की दुकान चलाते थे। तीन बेटियां और दो बेटे हैं। पति की दुकान से होने वाली आय से ही परिवार का भरण-पोषण होता था। रामभरोसे को लीवर कैंसर होने का पता चला। सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज नहीं होने पर निजी अस्पताल से इलाज चला। इलाज में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आया था। चार फीसदी ब्याज पर कर्ज लिया। जून में उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर आ गई है। मजदूरी करके परिवार चला रही हैं। कर्ज में से केवल 40 हजार रुपये दे पाई हैं।
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पढ़ाई छोड़ी, पिता के इलाज खर्च हुआ पैसा
दीपेंद्र सिसोदिया ने बताया कि सितंबर 2022 में उनके पिता और पूर्व प्रधान सेवानंद की कैंसर के चलते मौत हो गई। अप्रैल में उनके पैरों में असहनीय दर्द होने लगा था। जांच में पता चला कि उनको कैंसर है। पिता का बेहतर इलाज हो, इसके लिए दीपेंद्र ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी। छह माह तक निजी और सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे लेकिन वह बचे नहीं। अंतिम दौर में उनको असहनीय दर्द होता था। उसको देखकर परिवार के सदस्य परेशान होते थे। उनके इलाज में करीब छह लाख रुपये खर्च हुए।
पैर में दर्द हुआ तो जांच में पता चला कैंसर
विकास सिसोदिया ने बताया कि जनवरी के अंतिम सप्ताह में उनके पिता प्रेमपाल सिंह में कैंसर की पुष्टि हुई। उससे पहले पैर में दर्द को लेकर वह गाजियाबाद, दिल्ली, बुलंदशहर समेत शहरों में निजी अस्पतालों में जांच के लिए गए थे। जांच में उनके कैंसर होने की पुष्टि हुई। उनके कैंसर अंतिम स्टेज पर था। रीढ़ की हड्डी तक पहुंच गया था। उनको एम्स में भर्ती किया गया। वहां से उनको घर भेज दिया गया। उनको लगातार दर्द की शिकायत रहती थी। तेज दर्द होता था। चार जुलाई को उनकी मौत हो गई।