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Noida News: गुमनामी के अंधेरे में जी रहे भाला फेंक के स्वर्ण पदक विजेता

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उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक खिलाड़ी आज गुमनामी की जिंदगी जी रहा है । गांव में हुए पड़ोसी के मर्डर ने खिलाड़ी की जिंदगी बदल दी । मर्डर की रंजिश के चलते सेना में कैप्टन रहे सरनाम सिंह को घर परिवार के साथ गांव छोड़ना पड़ा । 1984 में नेपा में आयोजित हुए साउथ एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले सरनाम सिंह आज धौलपुर में रहते है । गांव आने पर पड़ोसी उन्हें जान से मारने की धमकी देते है । सरनाम सिंह भाला फेंकने के माहिर खिलाड़ी हुआ करते थे । साउथ एशियन गेम्स नेपाल में गोल्ड मेडल जीतने के अलावा सरनाम सिंह ने 1985 में जकार्ता में आयोजित हुए सिक्स एशियन ट्रैक एंड फील्ड गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया । प्रतियोगिता में पांचवा स्थान हासिल किया । इसके अलावा सरनाम सिंह ने 1985 में दिल्ली में आयोजित हुए राष्ट्रीय खेल में भी भारत की तरफ से प्रतिभाग किया था । 1989 में पाकिस्तान में आयोजित हुए फोर्थ सैफ गेम्स इस्लामाबाद में भी सरनाम सिंह ने भारतीय टीम की तरफ से भला फेक खेल में प्रतिभाग किया । शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया । इसके अलावा 1989 में दिल्ली में आयोजित हुए एशियाई ट्रैक एंड फील्ड गेम्स में भी सरनाम सिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया । प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया । खेल की दुनिया में राष्ट्र का नाम रोशन करने के बाद सरनाम सिंह अपने गांव अई वापस लौट आये । 24 जून 2020 को सरनाम सिंह के पड़ोसी कप्तान सिंह के बेटे जनार्दन सिंह का मर्डर हो गया था । मर्डर में सरनाम सिंह के भतीजे का नाम आया था । इसके बाद से सरनाम सिंह और उनके परिवार के बुरे दिन शुरू हो गए । मर्डर की रंजिश में सरनाम सिंह को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी । जान माल की धमकियों से परेशान सरनाम सिंह ने परिवार के साथ गांव से पलायन कर दिया । गांव में सरनाम सिंह का मकान बंद पड़ा है । मकान के गेट पर ताला लगा हुआ है । गांव की जमीन बंजर हो चुकी है । अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे सरनाम सिंह आगरा के अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई । अंत में थकहार कर सरनाम सिंह ने गांव छोड़ दिया । परिवार के साथ सरनाम सिंह अब धौलपुर में निवास करते हैं । रंजिश की वजह से गांव जाने में भी डरते हैं । सरनाम सिंह ने बताया कि उन्होंने रंजिश की वजह से गांव की 40 बीघा जमीन बेच दी है । अभी भी उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है । सरनाम सिंह का कहना है कि अगर उन्हें मौका मिला होता तो वह बहुत कुछ कर सकते थे । देश को जैवलिन थ्रो गेम्स के लिए एक से बढ़कर एक नए खिलाड़ी दे सकते थे । अब सरनाम सिंह 67 साल के हो चुके हैं । रंजिश की वजह से सरनाम सिंह की खेल प्रतिभा दम तोड़ चुकी है । अब सरनाम सिंह पेंशन के सहारे घर का खर्च चलते हैं । सर्वनाम सिंह आज भी अपने गांव वापस लौटना चाहते हैं । उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन गांव में चल रही रंजिश उनके इरादों को तोड़ देती है । गांव की तरफ जाने से रोक देती है । सरनाम सिंह आज भी अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं । दबंग से पीछा छुड़ाने के लिए हर उपाय आजमा रहे हैं । लेकिन रंजिश उनका पीछा नहीं छोड़ रही है । पड़ोसी आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सरनाम सिंह की जान के दुश्मन बने हुए हैं । देखना होगा सरकार और प्रशासनिक मशीनरी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे सरनाम सिंह को कब तक राहत दिलवा पाती है ।
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