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नोएडा: बिल्डरों पर मेहरबान रहा प्राधिकरण, उद्योगों पर ध्यान ही नहीं दिया

Sun, 02 Aug 2020 09:26 AM IST
प्राची प्रियम योगेश शर्मा, नोएडा
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नोएडा सेक्टर 11 में गिरी निर्माणाधीन इमारत - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली से सटे नोएडा की प्लानिंग औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई थी, लेकिन एक से डेढ़ दशक के अंतराल में यहां ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों की बाढ़ आ गई। 

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बिल्डरों को जमीन आवंटित करने में प्राधिकरण ने इतनी दरियादिली दिखाई कि औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार की संभावनाओं को ही लगभग खत्म कर दिया गया। नतीजा, फेज-1 जैसे औद्योगिक क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर इमारतें खड़ी होती गईं। 

आज यहां ऐसी सैकड़ों इकाइयां हैं, जो कभी भी सेक्टर-11 की तरह हादसे का सबब बन सकती हैं। हादसा होने के बाद प्राधिकरण और प्रशासनिक स्तर पर जांच की कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन नोएडा के इस सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर भवनों का निर्माण कराने वाले अफसरों होगी भी या नहीं, बड़ा सवाल बना हुआ है। 
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औद्योगिक संगठन इस हादसे के लिए प्राधिकरण को भी जिम्मेदार मान रहे हैं, जिसने पुराने उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रख उन्हें विस्तार का मौका नहीं दिया। सेक्टर-1 से लेकर 11 तक फेज-1 औद्योगिक क्षेत्र कहलाता है, जहां 5 हजार से ज्यादा इकाइयां हैं। 

इनमें 90 फीसदी इकाइयां 50 से 200 वर्गमीटर में हैं। अधिकांश इकाइयां पुरानी होने से कमजोर पड़ चुकी हैं। इनमें अवैध निर्माण तक हो गए, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी, जबकि प्राधिकरण का प्रशासनिक कार्यालय भी फेज-1 औद्योगिक क्षेत्र में ही है।

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श्रमिकों से लेकर मालिकों तक का आशियाना भी यहीं

उद्यमी औद्योगिक कोटे के अंतर्गत आवासीय भूखंड की मांग हमेशा उठाते रहे हैं। शायद यह भी वजह है कि फेज-1 औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाइयों में आवंटियों ने आशियाना तक बना लिया। 

सेक्टर-11 की जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, उसके मालिक आरके भारद्वाज भी वहीं रहते हैं। इतना ही नहीं, इस औद्योगिक क्षेत्र में हजारों की संख्या में श्रमिक भी फैक्ट्रियों में ही रहते हैं।

गोल्फ कोर्स नहीं उद्योगों को बढ़ावा चाहिए...
एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन का कहना है कि प्राधिकरण सेक्टर-151ए में 90 जमीन पर करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से गोल्फ कोर्स बनाने की योजना तैयार कर रहा है। सेक्टर-38 में पहले से ही एक गोल्फ क्लब चल रहा है। 

नया गोल्फ कोर्स बनाने की आवश्यकता नहीं लगती। इसके स्थान पर 450 से 800 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंड उद्यमियों को आवंटित किए जाने से रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

उद्योगों की फिक्र की होती तो नहीं होते हादसे
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि 42 साल पहले जिन लोगों को उद्योग चलाने के लिए छोटे-छोटे भूखंड दिए, उन्होंने अपने कारोबार को बढ़ाने के साथ ही नोएडा को आबाद भी किया, लेकिन इन उद्योगों को विस्तार की जगह नहीं मिलेगी तो उपलब्ध जमीन पर ही विकल्प तलाशेंगे। 

प्राधिकरण ने जरा भी उद्योगों की परवाह की होती तो आज ऐसे हादसे नहीं होते। जिले में अगर 20 हजार उद्योग हैं तो उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम भी संबंधित एजेंसियों को करना चाहिए, इन्हें सिर्फ आमदनी का जरिया न समझें।
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