उद्यमी औद्योगिक कोटे के अंतर्गत आवासीय भूखंड की मांग हमेशा उठाते रहे हैं। शायद यह भी वजह है कि फेज-1 औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाइयों में आवंटियों ने आशियाना तक बना लिया।
सेक्टर-11 की जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, उसके मालिक आरके भारद्वाज भी वहीं रहते हैं। इतना ही नहीं, इस औद्योगिक क्षेत्र में हजारों की संख्या में श्रमिक भी फैक्ट्रियों में ही रहते हैं।
गोल्फ कोर्स नहीं उद्योगों को बढ़ावा चाहिए...
एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन का कहना है कि प्राधिकरण सेक्टर-151ए में 90 जमीन पर करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से गोल्फ कोर्स बनाने की योजना तैयार कर रहा है। सेक्टर-38 में पहले से ही एक गोल्फ क्लब चल रहा है।
नया गोल्फ कोर्स बनाने की आवश्यकता नहीं लगती। इसके स्थान पर 450 से 800 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंड उद्यमियों को आवंटित किए जाने से रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
उद्योगों की फिक्र की होती तो नहीं होते हादसे
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि 42 साल पहले जिन लोगों को उद्योग चलाने के लिए छोटे-छोटे भूखंड दिए, उन्होंने अपने कारोबार को बढ़ाने के साथ ही नोएडा को आबाद भी किया, लेकिन इन उद्योगों को विस्तार की जगह नहीं मिलेगी तो उपलब्ध जमीन पर ही विकल्प तलाशेंगे।
प्राधिकरण ने जरा भी उद्योगों की परवाह की होती तो आज ऐसे हादसे नहीं होते। जिले में अगर 20 हजार उद्योग हैं तो उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम भी संबंधित एजेंसियों को करना चाहिए, इन्हें सिर्फ आमदनी का जरिया न समझें।