वर्ष 2012 में प्रदेश के विधानसभा चुनाव के समय रिटायर्ड कर्नल की जमा कराई गई पिस्तौल कोतवाली सेक्टर-39 से गायब हो गई। ग्यारह वर्ष तक उसकी खोज खबर नहीं ली गई। अब जरूरत पड़ने पर उसकी खोज शुरू हुई। मालखाने की तलाशी के बाद पिस्टल नहीं मिला।
मामले में तत्कालीन हेड मोहर्रिर बाबू खान के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सेक्टर-39 में रहने वाले सेवानिवृत्त कर्नल चरणजीत सिंह ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अपनी लाइसेंसी पिस्तौल कोतवाली सेक्टर-39 में जमा कराई थी।
इसके बाद उन्होंने इसकी खोज खबर नहीं ली और न ही मालखाने के प्रभारी ने इसकी जानकारी ली। कुछ माह पहले चरणजीत ने पिस्टल दूसरे के नाम कर दी थी। वह थाने पिस्टल लेने आए थे। ढूंढने के बाद भी मालखाने में पिस्टल नहीं मिली। मामले की जांच में पता चला कि तत्कालीन हेड मोहर्रिर (मालखाना) बाबू खान की तैनाती के वक्त पिस्टल गायब हुई।
मौजूदा हेड मोहर्रिर रविंद्र सिंह की शिकायत पर तत्कालीन मालखाना इंचार्ज बाबू खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक बाबू खान दरोगा होकर सेवानिवृत हो चुके हैं। वहीं, वादी पक्ष ने थाने की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसीपी रजनीश वर्मा का कहना है कि मामले की जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।