नोएडा में हजारों फ्लैटों के निर्माण पर संकट के पीछे की वजह मात्र 670 वर्ग मीटर आबादी की जमीन है, जिसे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के न छोड़ने पर पतवाड़ी गांव के किसान हरकरन सिंह ने कोर्ट में घसीट लिया।
उन्हीं की याचिका पर पतवाड़ी के किसानों को जमीन का पूरा हक देने का आदेश हुआ। वह कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन बड़े-बड़े अफसरों को कानूनी दांवपेंच में मात दे दी।
दरअसल, पतवाड़ी को ही आधार बनाकर कोर्ट ने 21 अक्तूबर 2011 को 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और 10 फीसदी जमीन देने का आदेश दिया था। यह आदेश नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 39 गांव के लिए हुआ था। जिसमें प्राधिकरण को करीब छह हजार करोड़ का अतिरिक्त मुआवजा किसानों को देना पड़ा।
ग्राम प्रधान ने बताई पूरी बात
गांव के पूर्व प्रधान भूलेराम बताते हैं कि गांव की जमीन पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2007 में जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
उसमें हरकरन की 28 बीघे खेती की जमीन के अलावा आबादी की वह जमीन भी अधिसूचित कर ली, जिसमें घर बनाकर परिवार के साथ रहते हैं। हरकरन ने विरोध किया।
प्राधिकरण के दबाव में उन्होंने बाद में मुआवजा तो उठा लिया, मगर आबादी की 670 वर्ग मीटर जमीन का मुआवजा नहीं उठाया। छह अप्रैल 2009 को उन्होंने कोर्ट में मामला दायर कर स्टे ऑर्डर ले आए।
बस यह हो जाता तो न जाते कोर्ट
पूर्व प्रधान बताते हैं, कि अगर प्राधिकरण ने हरकरन की 670 वर्ग मीटर जमीन जमीन छोड़ दी होती तो वे कोर्ट न जाते।
उनका कहना है कि हरकरन खुद कभी स्कूल नहीं गए, मगर जमीन बचाने के लिए हाईकोर्ट तक पहुंच गए और तमाम पढ़े-लिखे अफसरों को कोर्ट में पटखनी देकर जमीन छुड़ा लाए।
हरकरन ने गजरौला में जमीन खरीद ली है, इसलिए अब उनका ज्यादातर वक्त वहीं बीतता है। गांव में कम ही रुकते हैं। वे मोबाइल का भी इस्तेमाल नहीं करते।