श्रीकांत त्यागी के परिवार में कोई राजनीति में नहीं था लेकिन उसने खुद को सियासत में लाने का बहुत प्रयास किया। कई पार्टियों से टिकट लेने की कोशिश की लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। इस दौरान उसने नेताओं के साथ फोटो खिचाने का सिलसिला शुरु किया और हर पार्टी के बड़े नेता के साथ वो नजर आने लगा। इससे उसके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को लगता कि वो बहुत ही ताकतवर है और उसके संपर्क सत्ता में बने ही रहते हैं।
वह सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहने लगा और ममता बनर्जी और आचार्य प्रमोद कृष्णम जैसे नेताओं को फॉलो करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही वह नेताओं के साथ अपने फोटो को भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने लगा ताकि लोगों को उसके संपर्कों का अहसास हो सके। इसके आधार पर वह ठेके हासिल करने लगा और उसकी संपत्ति लगातार बढ़ने लगी। जिस ओमेक्स सोसाइटी में वह रह रहा था वहां पर भी उसने अवैध कब्जा कर रखा था। इतना ही नहीं वे सोसाइटी में दिए जाने वाले रखरखाव का भुगतान भी नहीं करता था और अगर कोई उससे मांगने जाता तो वह उसे धमकाकर वापस भेज देता था।
जो भी पार्टी सत्ता में रहती है वह उससे अपने संबंध बताता था। वर्तमान में श्रीकांत ने खुद को बीजेपी से जुड़ा नेता होने का दावा किया था। सोशल मीडिया पर बीजेपी के नेताओं के साथ उनके कुछ फोटो भी शेयर किए जा रहे हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उससे संबंधों को लेकर बयान जारी कर स्पष्ठ कर दिया है कि पार्टी का उससे कोई लेना देना नहीं है।
प्राधिकरण अफसरों पर रौब जमाता था श्रीकांत त्यागी
खुद को भाजपा नेता बताने वाला श्रीकांत त्यागी केंद्र और प्रदेश के शीर्ष नेताओं के नाम पर प्राधिकरण अधिकारियों पर रौब दिखाता था। उसने यमुना और ग्रेनो प्राधिकरण के अफसरों पर कई बार औद्योगिक प्लॉट आवंटित कराने का दबाव बनाया हालांकि वह कामयाब नहीं हो पाया। हाल ही में वह इसी सिलसिले में प्राधिकरण का चक्कर काट रहा था। श्रीकांत पर फ्लैट पर कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने राहत की सास ली है।
प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक वह तीनों प्राधिकरणों के अफसरों को फोटो दिखाकर रौब जमाता था। अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए वह बड़े नेताओं से फोन पर बात तक करा देता था। इससे प्राधिकरण के कई अधिकारी काफी दबाव में थे। वह कम रेट पर औद्योगिक और स्कूल के प्लॉट का आवंटन कराना चाहता था। अधिकारिक सूत्र बताते हैं कि तीनों प्राधिकरणों में अफसरों को सख्त लहजे से बात करता था और यदि कोई अधिकारी मिलने से इनकार कर देता था तो नेताओं से फोन कराकर मिलने को मजबूर करता था।
मोदीनगर में करता था राजनीति
श्रीकांत त्यागी मोदीनगर में राजनीतिक माहौल तैयार कर रहा था। वह वहां पर त्यागी वोट अधिक होने के कारण विधानसभा का टिकट मांगा था और शीर्ष नेताओं से सिफारिश भी कराई थी। मगर कामयाब नहीं हो पाया था। सूत्रों की माने तो गाजियाबाद जिला पंचायत अध्यक्ष बसंत त्यागी और श्रीकांत त्यागी काफी नजदीक थे। दोनों कई बार साथ घूमने भी गए थे। बसंत त्यागी और श्रीकांत त्यागी के साथ रहने वाले युवक रविवार को सोसाइटी में भी पहुंचे थे। इन दोनों के कुछ फोटो समर्थकों के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
जिले में नहीं था सक्रिय सदस्य
भाजपा नेताओं ने श्रीकांत त्यागी के खिलाफ शुरू से ही कार्रवाई कराने के लिए पुलिस को कह दिया था। चूंकि श्रीकांत गौतमबुद्ध नगर के भाजपा नेताओं के संपर्क में कम था। हालांकि उसने पिछले कुछ समय में काफी अच्छी कमाई की थी। वह घर पर नेताओं को बुलाता था और खूब सेवा करता था।