शहर की सड़कों पर 12 हजार ऑटो दौड़ रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण इनके लिए स्टैंड बनाना ही भूल गया। नतीजा ये हुआ, शहर की सड़कों को ही ऑटोवालों ने स्टैंड बना दिया है। हालात दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसके बाद भी प्राधिकरण ने ऑटो स्टैंड के नाम पर कागजों में योजनाएं तो बनीं लेकिन जमीन पर नहीं उतरीं।
ऑटोवालों की मनमानी सबसे ज्यादा मॉडल टाउन तिराहे पर देखने को मिल रही है। एक तरफ नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का काम और दूसरी तरफ बेलगाम ऑटो इस तिराहे पर जाम का सबब बने हुए हैं। सुबह और शाम पीक टाइम में तिराहा पार करने में आधे से पौना घंटा गंवाना पड़ रहा है।
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, परिवहन विभाग परमिट जारी करता रहा। ऑटो की भीड़ बढ़ती गई, लेकिन इनके लिए स्टैंड आज तक नहीं बने। हैरानी की बात है कि पूरे शहर में ऑटो के महज दो स्टैंड है। इनमें एक सिटी सेंटर और दूसरा सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन के पास है। गाजियाबाद-नोएडा बॉर्डर (मॉडल टाउन) पर सबसे ज्यादा ऑटो यात्री आते हैं। शहर का सबसे बड़ा मेट्रो स्टेशन यहां बना दिया गया लेकिन ऑटो स्टैंड बनाने की जरूरत नहीं समझी गई।
62 जगह बनने थे ऑटो स्टैंड
साल 2014 में नोएडा प्राधिकरण ने 62 ऑटो स्टैंड बनाने की योजना बनाई थी। स्टैंड बनने के बाद चौराहों पर ऑटो रोककर सवारियां उतारने-चढ़ाने पर पाबंदी लगाई जानी थी। एक साल में स्टैंड बनकर तैयार होने थे, लेकिन योजना सरकारी फाइलों में सिमटकर रह गई।
छह महीने में काटे 11 हजार चालान
ऑटोवालों ने पहले ही पूरे नोएडा की ट्रैफिक व्यवस्था को तार-तार करके रखा है। दिल्ली बॉर्डर लांघते ही एनएच-24 पर परेशानियों का सिलसिला शुरू हो जाता है और गाजियाबाद के लालकुआं कट तक समस्या बरकरार रहती हैं। नोएडा ट्रैफिक पुलिस पिछले छह माह में 10,908 ऑटो के चालान काट चुकी है जबकि करीब 500 ऑटो सीज किए जा चुके हैं।