दक्षिण कोरियाई कंपनी फोर्सबेल के सहयोग से दक्षिण भारत की कंपनी जिग्मा ग्लोबल ने नोएडा में कूड़ा हटाने की कवायद रविवार से शुरू कर दी। कूड़े के निस्तारण के लिए सेक्टर-54 में आठ करोड़ की लागत से मशीन की स्थापना की गई है। उत्तर भारत के किसी भी शहर में लगने वाली यह पहली मशीन है। नोएडा प्राधिकरण ने कंपनी को 1.5 लाख टन कूड़े के निस्तारण का ठेका दिया है।
ठेका मिलने के बाद दक्षिण कोरिया की कंपनी के प्रतिनिधियों ने पिछले दिनों नोएडा का दौरा किया था। इसके बाद सेक्टर-54 में कूड़ा निस्तारण के लिए मशीन लगानी शुरू की गई। मशीन से कूड़ा निस्तारण का ट्रायल भी किया गया। इसके बाद रविवार को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन ने संयंत्र का औपचारिक उद्घाटन कर दिया।
इस मौके पर एसीईओ राकेश कुमार मिश्र, ओएसडी राजेश सिंह सहित जिग्मा कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। दक्षिण कोरियाई कंपनी का दावा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम किया है। वहीं, भारतीय कंपनी का कहना है कि उसने दक्षिण भारत में सफलता पूर्वक इस काम को किया है और उसके पांच प्रोजेक्ट दक्षिण भारत में हैं।
ऐसे गायब हो जाएगा नोएडा का कूड़ा
कंपनी की ओर से सबसे पहले सेक्टर-54 में जमा 80 हजार मीट्रिक टन कूड़े पर वैज्ञानिक पद्धति से विंडो निर्माण व जैव रासायनिक प्रयोग किया गया। इसके बाद यह कूड़ा घटकर करीब 50 हजार मीट्रिक टन हो गया। अब इस कूड़े को उपचारित किया जाएगा यानी कूड़े से प्लास्टिक, ईंट के टुकड़े आदि को अलग-अलग किया जाएगा।
प्लास्टिक आरडीएफ के तौर पर जयपुर की एसीसी सीमेंट फैक्ट्री में प्रयोग होगा। वहीं, ईंट और ठोस टुकड़ों का प्रयोग गड्ढों के भरने या अन्य में इस्तेमाल होगा। इसके अलावा निस्तारण के बाद करीब 50 प्रतिशत कूड़ा मिट्टी की शक्ल में आ जाएगा, जो खाद का काम करेगा। इसका उपयोग किसान भी कर सकेंगे। वहीं प्राधिकरण का उद्यान विभाग भी इसका इस्तेमाल पार्कों में कर सकेगा। आखिर में सेक्टर-54 में कूड़ा गायब हो जाएगा।
दो लाख मीट्रिक टन कूड़े को करना होगा खत्म
शहर में सेक्टर-54 के अलावा सेक्टर-145, 123, 68 और 138 में करीब दो लाख मीट्रिक टन कूड़ा पड़ा हुआ है। सेक्टर-54 के करीब 50 हजार मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के बाद इस मशीन को सेक्टर-145 में स्थापित किया जाएगा और इससे कूड़े का निपटान किया जाएगा।
इसके अलावा यहां-वहां जमा कूड़े को भी यहां पहुंचाकर निस्तारण कराया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ वर्ष का वक्त लग सकता है। शुरुआती चरण में नोएडा प्राधिकरण के साथ कंपनी का करार करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण का है, जो कि आगे चलकर करार बढ़ने पर दो लाख टन हो जाएगा।